दीवार Poetry (page 38)

हमेशा का ये मंज़र है कि सहरा जल रहा है

फ़रहत एहसास

घर बनाने में तमाम अहल-ए-सफ़र लग गए हैं

फ़रहत एहसास

गर अपने आप में इंसान बढ़ता जा रहा है

फ़रहत एहसास

इक हवा आई है दीवार में दर करने को

फ़रहत एहसास

दिल ने इमदाद कभी हस्ब-ए-ज़रूरत नहीं दी

फ़रहत एहसास

देखो अभी लहू की इक धार चल रही है

फ़रहत एहसास

बदन और रूह में झगड़ा पड़ा है

फ़रहत एहसास

अब दिल की तरफ़ दर्द की यलग़ार बहुत है

फ़रहत एहसास

है मेरी आँखों में अक्स-ए-नविश्ता-ए-दीवार

फ़रहान सालिम

मिरे चराग़ो मिरा गंज-ए-बे-कराँ ले लो

फ़रहान सालिम

रग-ओ-पै में सरायत कर गया वो

फ़रीद परबती

किसी पे करना नहीं ए'तिबार मेरी तरह

फ़रीद परबती

ग़ुबार दिल पे बहुत आ गया है धो लें आज

फ़रीद जावेद

छिपकिली

फ़रीद इशरती

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे

फ़रीद इशरती

हिज्र मैं जो ली गई तस्वीर है

फ़क़ीह हैदर

ज़िंदगी जब्र है और जब्र के आसार नहीं

फ़ानी बदायुनी

तर्क-ए-वतन के बाद ही क़द्र-ए-वतन हुई

फ़ना निज़ामी कानपुरी

वो ख़ानुमाँ-ख़राब न क्यूँ दर-ब-दर फिरे

फ़ना निज़ामी कानपुरी

मज़दूर औरतें

फख्र ज़मान

लम्हों का भँवर चीर के इंसान बना हूँ

फख्र ज़मान

कुछ बात नहीं जिस्म अगर मेरा जला है

फख्र ज़मान

जाएँगे कहाँ सर पे जब आ जाएगा सूरज

फख्र ज़मान

सामने होते थे पहले जिस क़दर होते थे हम

फ़ैज़ान हाशमी

मिरे वजूद को मौजूदगी दिखाती थी

फ़ैज़ान हाशमी

काँच के शहर में पत्थर न उठाओ यारो

फ़ैज़ुल हसन

एक मुद्दत से सर-ए-बाम वो आया भी नहीं

फ़ैज़ुल हसन

यहाँ से शहर को देखो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

पैरिस

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

निसार मैं तेरी गलियों के

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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