दीवार Poetry (page 50)

सबा की बात सुनें फूल से कलाम करें

अल्ताफ़ परवाज़

ईंट दीवार से जब कोई खिसक जाती है

अल्ताफ़ परवाज़

उस के जाते ही ये क्या हो गई घर की सूरत

अल्ताफ़ हुसैन हाली

मिट्टी का दिया

अल्ताफ़ हुसैन हाली

हुब्ब-ए-वतन

अल्ताफ़ हुसैन हाली

उस के जाते ही ये क्या हो गई घर की सूरत

अल्ताफ़ हुसैन हाली

हक़ीक़त महरम-ए-असरार से पूछ

अल्ताफ़ हुसैन हाली

फूल से ज़ख़्मों का अम्बार सँभाले हुए हैं

आलोक मिश्रा

धूप अब सर पे आ गई होगी

आलोक मिश्रा

नाला-ए-फ़िराक़

अल्लामा इक़बाल

हिमाला

अल्लामा इक़बाल

फ़रमान-ए-ख़ुदा

अल्लामा इक़बाल

मकतबों में कहीं रानाई-ए-अफ़कार भी है

अल्लामा इक़बाल

इलाही बुलबुल-ए-गुलज़ार-मअनी कर लिसाँ मेरा

अलीमुल्लाह

फ़रेब

अली सरदार जाफ़री

वो मिरी दोस्त वो हमदर्द वो ग़म-ख़्वार आँखें

अली सरदार जाफ़री

वतन से दूर यारान-ए-वतन की याद आती है

अली सरदार जाफ़री

शम्अ' का मय का शफ़क़-ज़ार का गुलज़ार का रंग

अली सरदार जाफ़री

शबों की ज़ुल्फ़ की रू-ए-सहर की ख़ैर मनाओ

अली सरदार जाफ़री

चुनी हुई दीवार में दर

अली साहिल

इक तुर्फ़ा तमाशा सर-ए-बाज़ार बनेगा

अली मुतहर अशअर

नीम के उस पेड़ से उतरा है जिन

अली इमरान

धूप फैली तो कहा दीवार ने झुक कर मुझे

अली अकबर नातिक़

सफ़ीर-ए-लैला-2

अली अकबर नातिक़

ज़र्द फूलों में बसा ख़्वाब में रहने वाला

अली अकबर नातिक़

रो चले चश्म से गिर्या की रियाज़त कर के

अली अकबर नातिक़

घंटियाँ बजने से पहले शाम होने के क़रीब

अली अकबर नातिक़

हिज्र बना आज़ार सफ़र कैसे कटता

अली अकबर मंसूर

सारा दिन बे-कार बैठे शाम को घर आ गए

अली अकबर अब्बास

जो ख़ुद को पाएँ तो फिर दूसरा तलाश करें

अली अकबर अब्बास

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