दीवार Poetry (page 48)

आँख खुल कर अभी मानूस नहीं हो पाती

अंजुम सलीमी

तन्हाई का सफ़रनामा

अंजुम सलीमी

पुर्सा

अंजुम सलीमी

उम्र की सारी थकन लाद के घर जाता हूँ

अंजुम सलीमी

ख़ाक छानी न किसी दश्त में वहशत की है

अंजुम सलीमी

जस्त भरता हुआ फ़र्दा के दहाने की तरफ़

अंजुम सलीमी

अच्छे मौसम में तग-ओ-ताज़ भी कर लेता हूँ

अंजुम सलीमी

यहाँ तो फिर वही दीवार-ओ-दर निकल आए

अंजुम रूमानी

नहीं नाम-ओ-निशाँ साए का लेकिन यार बैठे हैं

अंजुम रूमानी

मैं हर दीवार के दोनों तरफ़ यूँ देख लेता हूँ

अंजुम नियाज़ी

मिरी आवाज़ सुन कर ज़िंदगी बेदार हो जैसे

अंजुम नियाज़ी

वस्ल की रात वो तन्हा होगा

अंजुम लुधियानवी

मिरे मज़ार पे आ कर दिए जलाएगा

अंजुम ख़याली

आज़ार मिरे दिल का दिल-आज़ार न हो जाए

अंजुम ख़याली

जो न हों कुछ तशरीह-तलब कम होते हैं

अंजुम इरफ़ानी

हूर-ओ-ग़िल्माँ के तलबगार से वाक़िफ़ मैं हूँ

अंजुम अज़ीमाबादी

नाम तेरा भी रहेगा न सितमगर बाक़ी

अनीस अंसारी

जहाँ दर था वहाँ दीवार क्यूँ है

अनीस अंसारी

कहा झुँझला के अहल-ए-क़ाफ़िला से एक रहबर ने

अम्न लख़नवी

मैं ने तस्वीर फेंक दी है मगर

अम्मार इक़बाल

हेलुसिनेशन

अम्मार इक़बाल

यूँही बे-बाल-ओ-पर खड़े हुए हैं

अम्मार इक़बाल

तीरगी ताक़ में जड़ी हुई है

अम्मार इक़बाल

उठ

अमजद नजमी

वो अभी अपने चेहरे में उतरा नहीं

अमजद इस्लाम अमजद

मोहब्बत की एक नज़्म

अमजद इस्लाम अमजद

हम-ज़ाद

अमजद इस्लाम अमजद

आख़िरी बोसा

अमजद इस्लाम अमजद

ये गर्द-बाद-ए-तमन्ना में घूमते हुए दिन

अमजद इस्लाम अमजद

पर्दे में लाख फिर भी नुमूदार कौन है

अमजद इस्लाम अमजद

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