दिल Poetry (page 386)

आग लगा दी पहले गुलों ने बाग़ में वो शादाबी की

आग़ा हज्जू शरफ़

पेश आने लगे हैं नफ़रत से

अफ़ज़ल पेशावरी

नौजवानी में अजब दिल की लगी होती है

अफ़ज़ल पेशावरी

मैं ने दिल-ए-बे-ताब पे जो जब्र किया है

अफ़ज़ल परवेज़

जो दर्द-ए-दिल कहो आहिस्ता बोलो

अफ़ज़ल परवेज़

मकान-ए-ख़्वाब में जंगल की बास रहने लगी

अफ़ज़ाल नवेद

ख़ाली हुआ गिलास नशा सर में आ गया

अफ़ज़ाल नवेद

हम ने कुछ पँख जो दालान में रख छोड़े हैं

अफ़ज़ाल नवेद

बाग़ क्या क्या शजर दिखाते हैं

अफ़ज़ाल नवेद

उस पेड़ को छुआ तो समर-दार हो गया

अफ़ज़ल मिनहास

मिटते हुए नुक़ूश-ए-वफ़ा को उभारिए

अफ़ज़ल मिनहास

मैं अपने दिल में नई ख़्वाहिशें सजाए हुए

अफ़ज़ल मिनहास

जो शख़्स भी मिला है वो इक ज़िंदा लाश है

अफ़ज़ल मिनहास

चुप रहे तो शहर की हंगामा आराई मिली

अफ़ज़ल मिनहास

तू मुझे तंग न कर ए दिल-ए-आवारा-मिज़ाज

अफ़ज़ल ख़ान

तिरी मसनद पे कोई और नहीं आ सकता

अफ़ज़ल ख़ान

इतनी सारी यादों के होते भी जब दिल में

अफ़ज़ल ख़ान

हमारा दिल ज़रा उकता गया था घर में रह रह कर

अफ़ज़ल ख़ान

उस लम्हे तिश्ना-लब रेत भी पानी होती है

अफ़ज़ल ख़ान

तभी तो मैं मोहब्बत का हवालाती नहीं होता

अफ़ज़ल ख़ान

राह भोला हूँ मगर ये मिरी ख़ामी तो नहीं

अफ़ज़ल ख़ान

मुझे रोना नहीं आवाज़ भी भारी नहीं करनी

अफ़ज़ल ख़ान

कल अपने शहर की बस में सवार होते हुए

अफ़ज़ल ख़ान

आदमी ख़्वार भी होता है नहीं भी होता

अफ़ज़ल ख़ान

तेरी दुनिया से ये दिल इस लिए घबराता है

अफ़ज़ल गौहर राव

गुज़रे तअ'ल्लुक़ात का अब वास्ता न दे

अफ़ज़ल अलवी

यूँ इलाज-ए-दिल बीमार किया जाएगा

अफ़ज़ल इलाहाबादी

ये बता दे मुझ को मेरे दिल किसे आवाज़ दूँ

अफ़ज़ल इलाहाबादी

यादों के नशेमन को जलाया तो नहीं है

अफ़ज़ल इलाहाबादी

तुम हमारे हो हम तुम्हारे हैं

अफ़ज़ल इलाहाबादी

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