दिन Poetry (page 13)

कम न थी सहरा से कुछ भी ख़ाना-वीरानी मिरी

तिलोकचंद महरूम

हर इक के दुख पे जो अहल-ए-क़लम तड़पता था

तिफ़्ल दारा

मरते मरते रौशनी का ख़्वाब तो पूरा हुआ

तौसीफ़ तबस्सुम

काश इक शब के लिए ख़ुद को मयस्सर हो जाएँ

तौसीफ़ तबस्सुम

शब-ए-तारीक हूँ नूर-ए-सहर होने की ख़्वाहिश है

तौक़ीर रज़ा

अपने घर पर बुला लिया उस ने

तौक़ीर अहमद

फिर यही बात न मैं भूल सका

तौक़ीर अब्बास

अपने मंज़र से जुदा था इक दिन

तौक़ीर अब्बास

मिरी सच्चाई हर सूरत तिरी मुट्ठी से निकलेगी

ताैफ़ीक़ साग़र

फ़क़ीरों का चलन यूँ जिस्म के अंदर महकता है

ताैफ़ीक़ साग़र

फिर तिरे हिज्र के जज़्बात ने अंगड़ाई ली

तसनीम फ़ारूक़ी

कुछ दिन से अजब बे-कली घेरे है तसव्वुर

तस्लीम अहमद तसव्वुर

मिल जाए अमाँ दुनिया में पल भर नहीं लगता

तस्लीम अहमद तसव्वुर

फ़र्क़ कुछ तो चाहिए अग़्यार से

मीर तस्कीन देहलवी

दिल को क़रार मिलता है अक्सर चुभन के बा'द

तासीर सिद्दीक़ी

ऐ मेरे दिल तू बता तुझ को गवारा क्या है

तरकश प्रदीप

किनारा कर न ऐ दुनिया मिरी हस्त-ए-ज़बूनी से

तारिक़ नईम

जमाल मुझ पे ये इक दिन में तो नहीं आया

तारिक़ नईम

मैं आ रहा था सितारों पे पाँव धरते हुए

तारिक़ नईम

दर-ओ-बस्त-ए-अनासिर पारा पारा होने वाला है

तारिक़ नईम

सरसब्ज़ थे हुरूफ़ प लहजे में हब्स था

तारिक़ जामी

वही आहटें दर-ओ-बाम पर वही रत-जगों के अज़ाब हैं

तारिक़ बट

मुझे भी नीम के जैसा न कर दे

तनवीर गौहर

दरिया में तुग़्यानी है

तनवीर गौहर

सूरतों के शहर में रौज़न ही रौज़न देख कर

तनवीर सामानी

अहबाब हो गए हैं बहुत मुझ से बद-गुमान

तनवीर सामानी

आख़िरी कील

तनवीर अंजुम

दुखों के रूप बहुत और सुखों के ख़्वाब बहुत

तनवीर अंजुम

ज़ेहन ज़िंदा है मगर अपने सवालात के साथ

तनवीर अहमद अल्वी

ग़म-ए-जहाँ में ग़म-ए-यार ज़म न कर पाया

तालिब हुसैन तालिब

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