दिन Poetry (page 24)

अब क़ैस है कोई न कोई आबला-पा है

शमीम हनफ़ी

आँखें ग़म-ए-फ़िराक़ से हैं तर इधर-उधर

शमीम फ़तेहपुरी

डूबते सूरज का मंज़र वो सुहानी कश्तियाँ

शमीम फ़ारूक़ी

बहुत घुटन है बहुत इज़्तिराब है मौला

शमीम फ़ारूक़ी

आसमाँ का रंग मेरी ज़ात में घुल जाएगा

शमीम फ़ारूक़ी

अपना साया देख कर मैं बे-तहाशा डर गया

शमीम अनवर

उम्र गुज़र जाती है क़िस्से रह जाते हैं

शमीम अब्बास

हर नफ़स दीदा-ए-दिल में तिरी यादों का हुजूम

शकूर जावेद

किसी की आँख से आँसू टपक रहे होंगे

शकील शम्सी

फूल से लोगों को मिट्टी में मिला कर आएगी

शकील सरोश

कहानी में छोटा सा किरदार है

शकील जमाली

ये दिल हर इक नई कोशिश पे यूँ धड़कता है

शकील ग्वालिआरी

शब की बहार सुब्ह की नुदरत न पूछिए

शकील बदायुनी

न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता है

शकील बदायुनी

जल्वा-ए-हुस्न-ए-करम का आसरा करता हूँ मैं

शकील बदायुनी

अब तक शिकायतें हैं दिल-ए-बद-नसीब से

शकील बदायुनी

आँखों से दूर सुब्ह के तारे चले गए

शकील बदायुनी

कच्चे रंगों का मौसम

शकील आज़मी

तवील हिज्र है इक मुख़्तसर विसाल के बा'द

शकील आज़मी

राह में घर के इशारे भी नहीं निकलेंगे

शकील आज़मी

हुआ न ख़त्म अज़ाबों का सिलसिला अब तक

शकील आज़मी

अजीब मंज़र है बारिशों का मकान पानी में बह रहा है

शकील आज़मी

वहाँ की रौशनियों ने भी ज़ुल्म ढाए बहुत

शकेब जलाली

रौशन हैं दिल के दाग़ न आँखों के शब-चराग़

शकेब जलाली

मुरझा के काली झील में गिरते हुए भी देख

शकेब जलाली

जहाँ तलक भी ये सहरा दिखाई देता है

शकेब जलाली

दिल के वीराने में इक फूल खिला रहता है

शकेब जलाली

न दिन पहाड़ लगे अब न रात भारी लगे

शकेब बनारसी

दीवार-ए-गिर्या

शाइस्ता मुफ़्ती

आज लगता है समुंदर में है तुग़्यानी सी

शाइस्ता मुफ़्ती

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