दिन Poetry (page 25)

मौत मेरी सखी

शाइस्ता हबीब

ख़्वाब की बातें

शाइस्ता हबीब

न दिन ही चैन से गुज़रा न कोई रात मिरी

शाइक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

तन्हाई से आती नहीं दिन रात मुझे नींद

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

रात दिन यार बग़ल में हो तो घर बेहतर है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

रात दिन जारी हैं कुछ पैदा नहीं इन का कनार

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

न मैं ने कुछ कहा तुझ से न तू ने मुझ से कुछ पूछा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मज़रा-ए-दुनिया में दाना है तो डर कर हाथ डाल

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

किया था दिन का वादा रात को आया तो क्या शिकवा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

एक दिन पूछा न 'हातिम' को कभू उस ने कि दोस्त

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तिरा दिल यार अगर माइल करे है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तरीक़त में अगर ज़ाहिद मुझे गुमराह जाने है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

रखता हूँ मैं हक़ पर नज़र कोई कुछ कहो कोई कुछ कहो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

क्या सताते हो रहो बंदा-नवाज़

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

क्या हुआ गर शैख़ यारो हाजी-उल-हरमैन है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

करूँ हूँ रात दिन फेरे कई फेरे मियाँ साहिब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़ ने चुटकी सी ली फिर आ के मेरी जाँ के बीच

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़ नहीं कोई नहंग है यारो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

एहसान तिरा दिल मिरा क्या याद करेगा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बे तिरे जान न थी जान मिरी जान के बीच

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

अजब अहवाल देखा इस ज़माने के अमीरों का

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दिन वस्ल के रंज-ए-शब-ए-ग़म भूल गए हैं

शैख़ मीर बख़्श मसरूर

अपने ज़ौक़-ए-दीद को अब कारगर पाता हूँ मैं

शैदा अम्बालवी

दुनिया अपनी मौत जल्द-अज़-जल्द मर जाने को है

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

दुनिया अपनी मौत जल्द-अज़-जल्द मर जाने को है

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

यूँ तिरी याद में दिन रात मगन रहता हूँ

शहज़ाद अहमद

तिरी तलाश तो क्या तेरी आस भी न रहे

शहज़ाद अहमद

खुले असरार उस पर जिस्म के आहिस्ता आहिस्ता

शहज़ाद अहमद

दिल पर भी आओ एक नज़र डालते चलें

शहज़ाद अहमद

अब भी वही दिन रात हैं लेकिन फ़र्क़ ये है

शहज़ाद अहमद

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