दिन Poetry (page 84)

यक़ीन बरसों का इम्कान कुछ दिनों का हूँ

अतहर नासिक

मैं तुझे भूलना चाहूँ भी तो ना-मुम्किन है

अतहर नासिक

कभी कभार भी कब साएबाँ किसी ने दिया

अतहर नासिक

अगर यक़ीन न रखते गुमान तो रखते

अतहर नासिक

इतने दिन के बाद तू आया है आज

अतहर नफ़ीस

मिस्ल-ए-बाद-ए-सबा तेरे कूचे में ऐ जान-ए-जाँ आए हैं

अतहर नफ़ीस

इतने दिन के बाद तू आया है आज

अतहर नफ़ीस

मिरी मुश्किल अगर आसाँ बना देते तो अच्छा था

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

दिल लगाना चाहिए चल कर किसी हैवान से

अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

कहानियाँ ख़मोश हैं पहेलियाँ उदास हैं

अतीक़ अंज़र

जुदाई हद से बढ़ी तो विसाल हो ही गया

अतीक़ इलाहाबादी

खिले हैं फूल उसी रंग की सताइश में

अतीक़ अहमद

मंज़िलें भी ये शिकस्ता-बाल-ओ पर भी देखना

अताउल हक़ क़ासमी

तन्हाइयों के दश्त में भागे जो रात भर

अता तुराब

मेहनत से मिल गया जो दफ़ीने के बीच था

अता तुराब

ढला जो दिन तो गया नूर-ए-आफ़्ताब भी साथ

अता हुसैन कलीम

ज़हराब-ए-हुस्न

असरार-उल-हक़ मजाज़

तिफ़्ली के ख़्वाब

असरार-उल-हक़ मजाज़

नूरा

असरार-उल-हक़ मजाज़

मुझे जाना है इक दिन

असरार-उल-हक़ मजाज़

आवारा

असरार-उल-हक़ मजाज़

यूँही बैठे रहो बस दर्द-ए-दिल से बे-ख़बर हो कर

असरार-उल-हक़ मजाज़

ये जहाँ बारगह-ए-रित्ल-ए-गिराँ है साक़ी

असरार-उल-हक़ मजाज़

निगाह-ए-लुत्फ़ मत उठ ख़ूगर-ए-आलाम रहने दे

असरार-उल-हक़ मजाज़

करिश्मा-साजी-ए-दिल देखता हूँ

असरार-उल-हक़ मजाज़

आने वाली कल की दे कर ख़बर गया ये दिन भी

असरार ज़ैदी

तक़द्दुस-ए-मआब

असरार जामई

मैं सच तो कह दूँ पर उस को कहीं बुरा न लगे

असरा रिज़वी

बुझ गए मंज़र उफ़ुक़ पर हर निशाँ मद्धम हुआ

असलम महमूद

अक्स जल जाएँगे आईने बिखर जाएँगे

असलम महमूद

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