दिया Poetry (page 69)

ये किस मक़ाम पे लाया गया ख़ुदाया मुझे

अज़ीज़ नबील

उस की सोचें और उस की गुफ़्तुगू मेरी तरह

अज़ीज़ नबील

मोजज़े का दर खुला और इक असा रौशन हुआ

अज़ीज़ नबील

गुज़रने वाली हवा को बता दिया गया है

अज़ीज़ नबील

तक़लीद अब मैं हज़रत-ए-वाइज़ की क्यूँ करूँ

अज़ीज़ लखनवी

तह में दरिया-ए-मोहब्बत के थी क्या चीज़ 'अज़ीज़'

अज़ीज़ लखनवी

दिल के अज्ज़ा में नहीं मिलता कोई जुज़्व-ए-निशात

अज़ीज़ लखनवी

आईना छोड़ के देखा किए सूरत मेरी

अज़ीज़ लखनवी

जो यहाँ महव-ए-मा-सिवा न हुआ

अज़ीज़ लखनवी

दुनिया को वलवला दिल-ए-नाशाद से हुआ

अज़ीज़ लखनवी

मिरी आँखें गवाह-ए-तल'अत-ए-आतिश हुईं जल कर

अज़ीज़ हामिद मदनी

हिकायत-ए-हुस्न-ए-यार लिखना हदीस-ए-मीना-ओ-जाम कहना

अज़ीज़ हामिद मदनी

बैठो जी का बोझ उतारें दोनों वक़्त यहीं मिलते हैं

अज़ीज़ हामिद मदनी

ये दिया मैसेज ट्वीटर पर फ़सादी शख़्स ने

अज़ीज़ फ़ैसल

वरक़ उलट दिया करता है बे-ख़याली में

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

मेरे हालात ने यूँ कर दिया पत्थर मुझ को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

हम ने सब को मुफ़्लिस पा के तोड़ दिया दिल का कश्कोल

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

फ़साना-दर-फ़साना फिर रही है ज़िंदगी जब से

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

पड़ा है ज़िंदगी के इस सफ़र से साबिक़ा अपना

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

ख़ुद में उतरूँगी तो मैं भी लापता हो जाऊँगी

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

हम कोई नादान नहीं कि बच्चों की सी बात करें

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

हटा के मेज़ से इक रोज़ आईना मैं ने

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

कोई किरदार अदा करता है क़ीमत इस की

अज़हर नवाज़

न जाने शाम ने क्या कह दिया सवेरे से

अज़हर नवाज़

दाग़ चेहरे का यूँही छोड़ दिया जाता है

अज़हर नवाज़

दिल की गली में चाँद निकलता रहता है

अज़हर इक़बाल

ये अलग बात कि मैं नूह नहीं था लेकिन

अज़हर इनायती

वो मुझ से मेरा तआ'रुफ़ कराने आया था

अज़हर इनायती

मैं समुंदर था मुझे चैन से रहने न दिया

अज़हर इनायती

ख़त उस के अपने हाथ का आता नहीं कोई

अज़हर इनायती

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.