दुनिया Poetry (page 12)

अपनी पलकों के शबिस्तान में रक्खा है तुम्हें

तारिक़ क़मर

उठा उठा के तिरे नाज़ ऐ ग़म-ए-दुनिया

तारिक़ नईम

किनारा कर न ऐ दुनिया मिरी हस्त-ए-ज़बूनी से

तारिक़ नईम

मैं आ रहा था सितारों पे पाँव धरते हुए

तारिक़ नईम

हवा में आए तो लौ भी न साथ ली हम ने

तारिक़ नईम

दर-ओ-बस्त-ए-अनासिर पारा पारा होने वाला है

तारिक़ नईम

अब ये हंगामा-ए-दुनिया नहीं देखा जाता

तारिक़ नईम

आज किस ख़्वाब की ताबीर नज़र आई है

तारिक़ नईम

ग़म की दीवार को मैं ज़ेर-ओ-ज़बर कर न सका

तारिक़ मतीन

नज़र का नश्शा बदन का ख़ुमार टूट गया

तारिक़ बट

भूली हुई राहों का सफ़र कैसा लगेगा

तारिक़ बट

माँगने से तो हुकूमत नहीं मिलने वाली

तनवीर गौहर

इश्क़ क्या शय है दोस्त क्या कहिए

तनवीर गौहर

दिलों में बुग़्ज़ के ख़ाने न होते

तनवीर गौहर

चढ़ता सूरज उड़ता बादल बहता दरिया कुछ भी नहीं

तनवीर गौहर

सुनाओ मुझे भी एक लतीफ़ा

तनवीर अंजुम

राएगाँ सुब्ह की चिता पर

तनवीर अंजुम

इंतिज़ार

तनवीर अंजुम

बे-रहम शायरों के जुर्म

तनवीर अंजुम

सूरज सारा शहर डराता रहता है

तनवीर अंजुम

बात कुछ यूँ है कि ये ख़ौफ़ का मंज़र तो नहीं

तन्हा तिम्मापुरी

सारी दुनिया के सितम और मिरा दिल तन्हा

तमन्ना जमाली

माल-ओ-ज़र की क़द्र क्या? ख़ून-ए-जिगर के सामने

तालिब हुसैन तालिब

माल-ओ-ज़र की क़द्र क्या ख़ून-ए-जिगर के सामने

तालिब हुसैन तालिब

इस तरह तुझे इश्क़ किया है कि ये दुनिया

तालीफ़ हैदर

बस एक शय मिरे अंदर तमाम होती हुई

तालीफ़ हैदर

आहिस्ता-रवी शहर को काहिल न बना दे

तालीफ़ हैदर

हश्र में फिर वही नक़्शा नज़र आता है मुझे

ताजवर नजीबाबादी

ग़म-ए-मोहब्बत में दिल के दाग़ों से रू-कश-ए-लाला-ज़ार हूँ मैं

ताजवर नजीबाबादी

ये जो कुछ आज है कल तो नहीं है

ताज भोपाली

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