दुनिया Poetry (page 30)

निकले तिरी दुनिया के सितम और तरह के

शानुल हक़ हक़्क़ी

मोहब्बत ख़ार-ए-दामन बन के रुस्वा हो गई आख़िर

शानुल हक़ हक़्क़ी

ईमा-ए-ग़ज़ल करती हैं मौसम की अदाएँ

शानुल हक़ हक़्क़ी

ऐ दिल तिरे ख़याल की दुनिया कहाँ से लाएँ

शानुल हक़ हक़्क़ी

ऐ दिल अब और कोई क़िस्सा-ए-दुनिया न सुना

शानुल हक़ हक़्क़ी

उठ गई उस की नज़र मैं जो मुक़ाबिल से उठा

शाद आरफ़ी

खरी बातें ब-अंदाज़-ए-सुख़न कह दूँ तो क्या होगा

शाद आरफ़ी

शुऊर-ए-क़ैस ने सहरा में ख़ुद-कुशी कर ली

सीन शीन आलम

मज़ा जब है उसे बर्क़-ए-तजल्ला देखने वाले

सीमाब बटालवी

वो दुनिया थी जहाँ तुम बंद करते थे ज़बाँ मेरी

सीमाब अकबराबादी

'सीमाब' दिल हवादिस-ए-दुनिया से बुझ गया

सीमाब अकबराबादी

मिरी ख़ामोशियों पर दुनिया मुझ को तअन देती है

सीमाब अकबराबादी

है हुसूल-ए-आरज़ू का राज़ तर्क-ए-आरज़ू

सीमाब अकबराबादी

दुनिया है ख़्वाब हासिल-ए-दुनिया ख़याल है

सीमाब अकबराबादी

देखते ही देखते दुनिया से मैं उठ जाऊँगा

सीमाब अकबराबादी

गौतम-बुद्ध

सीमाब अकबराबादी

ज़ब्त से ना-आश्ना हम सब्र से बेगाना हम

सीमाब अकबराबादी

वुसअतें महदूद हैं इदराक-ए-इंसाँ के लिए

सीमाब अकबराबादी

शाम-ए-फ़ुर्क़त इंतिहा-ए-गर्दिश-ए-अय्याम है

सीमाब अकबराबादी

नाहक़ शिकायत-ए-ग़म-ए-दुनिया करे कोई

सीमाब अकबराबादी

न वो फ़रियाद का मतलब न मंशा-ए-फ़ुग़ाँ समझे

सीमाब अकबराबादी

मुझे फ़िक्र-ओ-सर-ए-वफ़ा है हनूज़

सीमाब अकबराबादी

मेरी रिफ़अत पर जो हैराँ है तो हैरानी नहीं

सीमाब अकबराबादी

ख़त्म इस तरह नज़ा-ए-हक़-ओ-बातिल हो जाए

सीमाब अकबराबादी

जो उम्र तेरी तलब में गँवाए जाते हैं

सीमाब अकबराबादी

जरस है कारवान-ए-अहल-ए-आलम में फ़ुग़ाँ मेरी

सीमाब अकबराबादी

ग़म मुझे हसरत मुझे वहशत मुझे सौदा मुझे

सीमाब अकबराबादी

दिल की बिसात क्या थी निगाह-ए-जमाल में

सीमाब अकबराबादी

चमक जुगनू की बर्क़-ए-बे-अमाँ मालूम होती है

सीमाब अकबराबादी

ब-क़ैद-ए-वक़्त ये मुज़्दा सुना रहा है कोई

सीमाब अकबराबादी

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