दुनिया Poetry (page 32)

सुब्ह को चैन न हो शाम को आराम न हो

सरवर आलम राज़

क्या तमाशा देखिए तहसील-ए-ला-हासिल में है

सरवर आलम राज़

जिस क़दर शिकवे थे सब हर्फ़-ए-दुआ होने लगे

सरवर आलम राज़

ढूँडते ढूँडते ख़ुद को मैं कहाँ जा निकला

सरवर आलम राज़

मैं तुम्हें याद कर रहा था

सरवत हुसैन

तेरे लिए ईजाद हुआ था लफ़्ज़ जो है रा'नाई का

सरताज आलम आबिदी

भँवर में मशवरे पानी से लेता हूँ

सरफ़राज़ ज़ाहिद

होश जाता रहा दुनिया की ख़बर ही न रही

सरफ़राज़ ख़ालिद

सहरा कोई बस्ती कोई दरिया है कि तुम हो

सरफ़राज़ ख़ालिद

हर लम्हे मैं सदियों का अफ़्साना होता है

सरफ़राज़ ख़ालिद

आँखों में अगर आप की सूरत नहीं होती

सरफ़राज़ अबद

इस दौर के मर्दों की जो की शक्ल-शुमारी

सरफ़राज़ शाहिद

वही मक़्बूल लीडर और डिप्लोमैट होता है

सरफ़राज़ शाहिद

शादी के जो अफ़्साने हैं रंगीन बहुत हैं

सरफ़राज़ शाहिद

तसव्वुरात की दुनिया सजाए बैठे हैं

सरदार सोज़

मैं फ़र्त-ए-मसर्रत से डर है कि न मर जाऊँ

सरदार सोज़

लाख हो माज़ी दामन-गीर

सरदार सोज़

हर इक दिल यहाँ है मोहब्बत से आरी

सरदार सोज़

अफ़्सोस क्या जो हम भी तुम्हारे नहीं रहे

सरदार सोज़

एक ही ज़िंदा बचा है ये निराला पागल

सरदार सलीम

अजब हैं सूरत-ए-हालात अब के

सरदार सलीम

उन बुतों से रब्त तोड़ा चाहिए

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

हैं बहुत देखे चाहने वाले

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

न जाने कैसी आँधी चल रही है

सदार आसिफ़

मैं जिन को ढूँडने निकला था गहरे ग़ारों में

सदार आसिफ़

ख़ता उस की मुआफ़ी से बड़ी है

सदार आसिफ़

ग़म-ए-हयात का झगड़ा मिटा रहा है कोई

सरदार अंजुम

ग़म-ए-हयात का झगड़ा मिटा रहा है कोई

सरदार अंजुम

सितमगर तुझ से हम कब शिकवा-ए-बेदाद करते हैं

सरस्वती सरन कैफ़

कहीं ये तस्कीन-ए-दिल न देखी कहीं ये आराम-ए-जाँ न देखा

सरस्वती सरन कैफ़

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