शोक Poetry (page 121)

ये क्या कहा कि ग़म-ए-इश्क़ नागवार हुआ

असग़र गोंडवी

मता-ए-ज़ीस्त क्या हम ज़ीस्त का हासिल समझते हैं

असग़र गोंडवी

हुस्न को वुसअतें जो दीं इश्क़ को हौसला दिया

असग़र गोंडवी

है दिल-ए-नाकाम-ए-आशिक़ में तुम्हारी याद भी

असग़र गोंडवी

गर्म-ए-तलाश-ओ-जुस्तुजू अब है तिरी नज़र कहाँ

असग़र गोंडवी

अक्स किस चीज़ का आईना-ए-हैरत में नहीं

असग़र गोंडवी

आलाम-ए-रोज़गार को आसाँ बना दिया

असग़र गोंडवी

जाने लगे हैं अब दम-ए-सर्द आसमाँ तलक

असीर लखनवी

ख़ुदा की देन है जिस को नसीब हो जाए

असर सहबाई

तुम्हारी याद में दुनिया को हूँ भुलाए हुए

असर सहबाई

तुम्हारी फ़ुर्क़त में मेरी आँखों से ख़ूँ के आँसू टपक रहे हैं

असर सहबाई

लुत्फ़ गुनाह में मिला और न मज़ा सवाब में

असर सहबाई

निगह-ए-शौक़ को यूँ आइना-सामानी दे

असर लखनवी

अश्क-ए-गुल-रंग निसार-ए-ग़म-ए-जानाना करें

असर लखनवी

उल्फ़त का है मज़ा कि 'असर' ग़म भी साथ हों

असर अकबराबादी

फ़िक्र-ए-जहान दर्द-ए-मोहब्बत फ़िराक़-ए-यार

असर अकबराबादी

कोई हमदम बना के देखो तुम

असर अकबराबादी

जाने क्यूँ लोग ग़म से डरते हैं

असर अकबराबादी

न आया ग़म भी मोहब्बत में साज़गार मुझे

असद भोपाली

मैं अब तेरे सिवा किस को पुकारूँ

असद भोपाली

न साथी है न मंज़िल का पता है

असद भोपाली

गिराँ गुज़रने लगा दौर-ए-इंतिज़ार मुझे

असद भोपाली

ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा होगा

असद भोपाली

दो-जहाँ से मावरा हो जाएगा

असद भोपाली

पोशीदा क्यूँ है तूर पे जल्वा दिखा के देख

असअ'द बदायुनी

मिरे लोग ख़ेमा-ए-सब्र में मिरे शहर गर्द-ए-मलाल में

असअ'द बदायुनी

ख़ुशी भी अब सरापा ग़म लगे है

असअ'द बदायुनी

सीने में ज़ब्त-ए-ग़म से छाला उभर रहा है

आरज़ू लखनवी

ये दास्तान-ए-दिल है क्या हो अदा ज़बाँ से

आरज़ू लखनवी

वो सर-ए-बाम कब नहीं आता

आरज़ू लखनवी

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