शोक Poetry (page 33)

दर्द में जब कमी सी होती है

शातिर हकीमी

मरने वाले से जलन

शारिक़ कैफ़ी

दूसरे हाथ का दुख

शारिक़ कैफ़ी

बहरूपिया

शारिक़ कैफ़ी

सफ़र से मुझ को बद-दिल कर रहा था

शारिक़ कैफ़ी

पहली बार वो ख़त लिक्खा था

शारिक़ कैफ़ी

आइने का साथ प्यारा था कभी

शारिक़ कैफ़ी

ग़ज़ल वही है जो हो शाख़-ए-गुल-निशाँ की तरह

शारिक़ ईरायानी

जो अपनी चश्म-ए-तर से दिल का पारा छोड़ जाता है

शारिब मौरान्वी

अपनी रूदाद कहूँ या ग़म-ए-दुनिया लिक्खूँ

शरर फ़तेह पुरी

मौज-ए-दरिया को पिएँ क्या ग़म-ए-ख़म्याज़ा करें

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

उर्दू

शम्स रम्ज़ी

ये अर्ज़-ओ-समा क़ुलज़ुम-ओ-सहरा मुतहर्रिक

शम्स रम्ज़ी

मुश्तइ'ल हो गया वो ग़ुंचा-दहन दानिस्ता

शम्स रम्ज़ी

ये घर जो हमारे लिए अब दश्त-ए-जुनूँ है

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

न कोई अपना ग़म है और न अब कोई ख़ुशी अपनी

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

मिरे ए'तिमाद को ग़म मिला मिरी जब किसी पे नज़र गई

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

दूर फ़ज़ा में एक परिंदा खोया हुआ उड़ानों में

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

बहार-ए-ज़ीस्त की महरूमियाँ अरे तौबा

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

आँखों में हिज्र चेहरे पे ग़म की शिकन तो है

शमीम रविश

बुझा है दिल तो न समझो कि बुझ गया ग़म भी

शमीम करहानी

रौशनी तेज़ करो

शमीम करहानी

राहगुज़र

शमीम करहानी

ज़ुल्मत-गह-ए-दौराँ में सुब्ह-ए-चमन-ए-दिल हूँ

शमीम करहानी

ज़बाँ को हुक्म ही कहाँ कि दास्तान-ए-ग़म कहें

शमीम करहानी

ये ख़ुशी ग़म-ए-ज़माना का शिकार हो न जाए

शमीम करहानी

वो जुनूँ के अहद की चाँदनी ये गहन गहन की उदासियाँ

शमीम करहानी

वो दिल भी जलाते हैं रख देते हैं मरहम भी

शमीम करहानी

शराब ओ शेर के साँचे में ढल के आई है

शमीम करहानी

सहर को दे के नई निकहत-ए-हयात गई

शमीम करहानी

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