शोक Poetry (page 40)

बे-ताबी-ए-ग़म-हा-ए-दरूँ कम नहीं होगी

शहज़ाद अहमद

आप भी नहीं आए नींद भी नहीं आई

शहज़ाद अहमद

सारी दुनिया के मसाइल यूँ मुझे दरपेश हैं

शहरयार

सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का

शहरयार

हम ने तो कोई बात निकाली नहीं ग़म की

शहरयार

ज़वाल की हद

शहरयार

मौत

शहरयार

अहद-ए-हाज़िर की दिल-रुबा मख़्लूक़

शहरयार

तू कहाँ है तुझ से इक निस्बत थी मेरी ज़ात को

शहरयार

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है

शहरयार

सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का

शहरयार

नशात-ए-ग़म भी मिला रंज-ए-शाद-मानी भी

शहरयार

जुदा हुए वो लोग कि जिन को साथ में आना था

शहरयार

हुजूम-ए-दर्द मिला ज़िंदगी अज़ाब हुई

शहरयार

हज़ार बार मिटी और पाएमाल हुई है

शहरयार

पतंग उड़ाने से पहले

शहराम सर्मदी

लौह-ए-अय्याम

शहराम सर्मदी

कार-ए-बेहूदा

शहराम सर्मदी

मिरे सुख़न पे इक एहसान अब के साल तो कर

शहराम सर्मदी

मता-ए-पास-ए-वफ़ा खो नहीं सकूँगा मैं

शहराम सर्मदी

हम अपने इश्क़ की बाबत कुछ एहतिमाल में हैं

शहराम सर्मदी

साहिल पे ये टूटे हुए तख़्ते जो पड़े हैं

शहूद आलम आफ़ाक़ी

ताक़-ए-जाँ में तेरे हिज्र के रोग संभाल दिए

शहनाज़ नूर

हम-सफ़र ज़ीस्त का सूरज को बनाए रक्खा

शहनाज़ नूर

गुलशन-ए-ना-आफ़रीदा

शहनाज़ नबी

आओ फिर मिल जाएँ सब बातें पुरानी छोड़ कर

शहनवाज़ ज़ैदी

आप की आँखों में आँसू देख कर

शाहजहाँ बानो याद

वफ़ा-परस्त जहान-ए-वफ़ा को ले डूबे

शाहजहाँ बानो याद

याद के शहर मिरी जाँ से गुज़र

शाहिदा तबस्सुम

ठहरा है क़रीब-ए-जान आ कर

शाहिदा हसन

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