शोक Poetry (page 53)

'बाक़र' निशाना-ए-ग़म-ओ-रंज-ओ-अलम तो हो

सज्जाद बाक़र रिज़वी

अँधेरे दिन की सफ़ारत को आए हैं अब के

सज्जाद बाक़र रिज़वी

अब वो जो नहीं उन की तमन्ना भी बहुत है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

खोल कर बात का भरम दोनों

सज्जाद बलूच

खोल कर बात का भरम दोनों

सज्जाद बलूच

वो इश्क़ जो हम को लाहिक़ था

साजिदा ज़ैदी

मी-यौमिल-हिसाब

साजिदा ज़ैदी

कब से महव-ए-सफ़र हो

साजिदा ज़ैदी

हमारी रूह का नग़्मा कहाँ है?

साजिदा ज़ैदी

फ़क़ीरी में

साजिदा ज़ैदी

दौर उफ़्तादगी

साजिदा ज़ैदी

रात गहरी है तो फिर ग़म भी फ़रावाँ होंगे

साजिदा ज़ैदी

किश्त-ए-वीराँ की तरह तिश्ना रही रात मिरी

साजिदा ज़ैदी

शाम-ए-ग़म की सहर नहीं होती

साजिद सिद्दीक़ी लखनवी

जज़्बा-ए-इश्क़ भी है गर्मी-ए-बाज़ार भी है

साजिद सिद्दीक़ी लखनवी

हर तमन्ना दिल से रुख़्सत हो गई

साजिद सिद्दीक़ी लखनवी

रूह को पहले ख़ाकसार किया

साजिद हमीद

सोच की लहरों का मजमा' ठीक है

साजिद असर

चलो दुनिया से मिलना छोड़ देंगे

साजिद अमजद

तू ने पूछा है मिरे दोस्त!

साइमा असमा

पंक्चुवेशन

साइमा असमा

कुल्लिया

साइमा असमा

ज़ख़्मों को मिरे रंग हिना दे गई सबा

सैलानी सेवते

वो भी हमें सरगिराँ मिले हैं

सैफ़ुद्दीन सैफ़

उम्र गुज़री मिरी शीरीनी-ए-गुफ़्तार के साथ

सैफ़ुद्दीन सैफ़

तेरी आँखों में रंग-ए-मस्ती है

सैफ़ुद्दीन सैफ़

रुख़ पे यूँ झूम कर वो लट जाए

सैफ़ुद्दीन सैफ़

मिरी दास्तान-ए-हसरत वो सुना सुना के रोए

सैफ़ुद्दीन सैफ़

मग़रूर थे अपनी ज़ात पर हम

सैफ़ुद्दीन सैफ़

लुत्फ़ फ़रमा सको तो आ जाओ

सैफ़ुद्दीन सैफ़

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