शोक Poetry (page 54)

क्यूँ उजड़ जाती है दिल की महफ़िल

सैफ़ुद्दीन सैफ़

क्या मंज़िल-ए-ग़म सिमट गई है

सैफ़ुद्दीन सैफ़

कोई नहीं आता समझाने

सैफ़ुद्दीन सैफ़

खोल कर इन सियाह बालों को

सैफ़ुद्दीन सैफ़

जब तसव्वुर में न पाएँगे तुम्हें

सैफ़ुद्दीन सैफ़

हसीन रातों जमील तारों की याद सी रह गई है बाक़ी

सैफ़ुद्दीन सैफ़

गरचे सौ बार ग़म-ए-हिज्र से जाँ गुज़री है

सैफ़ुद्दीन सैफ़

दर-पर्दा जफ़ाओं को अगर जान गए हम

सैफ़ुद्दीन सैफ़

अब वो सौदा नहीं दीवानों में

सैफ़ुद्दीन सैफ़

आए थे उन के साथ नज़ारे चले गए

सैफ़ुद्दीन सैफ़

ख़ुशियाँ तमाम ग़म में वो तब्दील कर गया

सैफ़ी सरौंजी

ख़ुशबू है शरारत है रंगीन जवानी है

सैफ़ी प्रेमी

तन्हाई के शो'लों पे मचलने के लिए था

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

सीने की आग आतिश-ए-महशर हो जिस तरह

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

साए जो संग-ए-राह थे रस्ते से हट गए

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

ओढ़ी रिदा-ए-दर्द भी हालात की तरह

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

इतने दुखी हैं हम को मसर्रत भी ग़म बने

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

कर के मसहूर मुझे चश्म-ए-करम से पहले

सैफ़ बिजनोरी

जो शिकायत-ए-ग़म-ए-ज़िंदगी कभी लब पर अपने न ला सके

साइब आसमी

दिल में रहना है परेशान ख़यालों का हुजूम

साइब आसमी

दिल इज़्तिराब में है जिगर इल्तिहाब में

साइब आसमी

उन का ग़म उन का तसव्वुर उन के शिकवे अब कहाँ

साहिर लुधियानवी

हम ग़म-ज़दा हैं लाएँ कहाँ से ख़ुशी के गीत

साहिर लुधियानवी

अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं

साहिर लुधियानवी

विर्सा

साहिर लुधियानवी

शिकस्त

साहिर लुधियानवी

सर-ज़मीन-ए-यास

साहिर लुधियानवी

नया सफ़र है पुराने चराग़ गुल कर दो

साहिर लुधियानवी

नाकामी

साहिर लुधियानवी

मुझे सोचने दे

साहिर लुधियानवी

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