घर Poetry (page 127)

हमारे ख़ून के प्यासे पशेमानी से मर जाएँ

अफ़ज़ल ख़ान

आदमी ख़्वार भी होता है नहीं भी होता

अफ़ज़ल ख़ान

ये कैसे ख़्वाब की ख़्वाहिश में घर से निकला हूँ

अफ़ज़ल गौहर राव

तुम्हें ही सहरा सँभालने की पड़ी हुई है

अफ़ज़ल गौहर राव

मैं सुन रहा हूँ जो दुनिया सुना रही है मुझे

अफ़ज़ल गौहर राव

इसी लिए भी नए सफ़र से बंधे हुए हैं

अफ़ज़ल गौहर राव

हर आइने में तिरा ही धुआँ दिखाई दिया

अफ़ज़ल गौहर राव

लुटा रहा हूँ मैं लाल-ओ-गुहर अँधेरे में

अफ़ज़ल इलाहाबादी

अब तो हर एक अदाकार से डर लगता है

अफ़ज़ल इलाहाबादी

हमें भूल जाना चाहिए

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

अगर उन्हें मालूम हो जाए

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

कोई न हर्फ़-ए-नवेद-ओ-ख़बर कहा उस ने

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

कभी न ख़ुद को बद-अंदेश-ए-दश्त-ओ-दर रक्खा

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

दीवारों में दर होता तो अच्छा था

अफ़ज़ाल फ़िरदौस

दीवारों में दर होता तो अच्छा था

अफ़ज़ाल फ़िरदौस

जो साथ लाए थे घर से वो खो गया है कहीं

आफ़ताब शम्सी

यादें

आफ़ताब शम्सी

नर्स

आफ़ताब शम्सी

पयाम-ए-आश्ती इक ढोंग दोस्ती का था

आफ़ताब शम्सी

जू-ए-रवाँ हूँ ठहरा समुंदर नहीं हूँ मैं

आफ़ताब शम्सी

मुंकिर का ख़ौफ़

आफ़ताब इक़बाल शमीम

वैसे तो बहुत धोया गया घर का अंधेरा

आफ़ताब इक़बाल शमीम

रिज़्क़ का जब नादारों पर दरवाज़ा बंद हुआ

आफ़ताब इक़बाल शमीम

घड़ी घड़ी उसे रोको घड़ी घड़ी समझाओ

आफ़ताब हुसैन

फ़सील-ए-शहर-ए-तमन्ना में दर बनाते हुए

आफ़ताब हुसैन

प्यासी हैं रगें जिस्म को ख़ूँ मिल नहीं सकता

आफ़ताब आरिफ़

ये रेग-ए-रवाँ याद-दहानी तो नहीं क्या

आफ़ताब अहमद

खुली आँखों में दर आने से पहले

आफ़ताब अहमद

यास है हसरत है ग़म है और शब-ए-दीजूर है

अफ़सर मेरठी

तलाश

अफ़रोज़ आलम

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