घर Poetry (page 19)
शायद यूँही सिमट सकें घर की ज़रूरतें
तनवीर सिप्रा
छत की कड़ियाँ जाँच ले दीवार-ओ-दर को देख ले
तनवीर सिप्रा
सूरतों के शहर में रौज़न ही रौज़न देख कर
तनवीर सामानी
अहबाब हो गए हैं बहुत मुझ से बद-गुमान
तनवीर सामानी
सफ़र और क़ैद में अब की दफ़अ' क्या हुआ
तनवीर अंजुम
ख़ार चुनते हुए
तनवीर अंजुम
चार साल बा'द
तनवीर अंजुम
अदम कथा
तनवीर अंजुम
अजीब शख़्स है पत्थर से पर बनाता है
तनवीर अहमद अल्वी
जलना हो तो मुझ से जल
तन्हा तिम्मापुरी
बात कुछ यूँ है कि ये ख़ौफ़ का मंज़र तो नहीं
तन्हा तिम्मापुरी
जिहत को बे-जिहती के हुनर ने छीन लिया
तालिब जोहरी
धूप जब तक सर पे थी ज़ेर-ए-क़दम पाए गए
तालिब जोहरी
माल-ओ-ज़र की क़द्र क्या ख़ून-ए-जिगर के सामने
तालिब हुसैन तालिब
ख़िश्त-ए-जाँ दरमियान लाने में
तालिब हुसैन तालिब
भेज कर शहर हारती है मुझे
तालिब हुसैन तालिब
ये जो कुछ आज है कल तो नहीं है
ताज भोपाली
दिल तेरी नज़र की शह पा कर मिलने के बहाने ढूँढे है
ताज भोपाली
मुझ को कहानियाँ न सुना शहर को बचा
तैमूर हसन
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
तहज़ीब हाफ़ी
ये एक बात समझने में रात हो गई है
तहज़ीब हाफ़ी
तू ने क्या क़िंदील जला दी शहज़ादी
तहज़ीब हाफ़ी
तो तय हुआ ना कि जब भी लिखना रुतों के सारे अज़ाब लिखना
ताहिर तोनस्वी
कोई हसीं मंज़र आँखों से जब ओझल हो जाएगा
ताहिर फ़राज़
शहर को चोट पे रखती है गजर में कोई चीज़
तफ़ज़ील अहमद
मेहवर पे भी गर्दिश मिरी मेहवर से अलग हो
तफ़ज़ील अहमद
जहान-ए-दिल में सन्नाटा बहुत है
ताबिश मेहदी
बला से मर्तबे ऊँचे न रखना
ताबिश मेहदी
बे-घरी
ताबिश कमाल
क्या कहूँ वो किधर नहीं रहता
ताबिश कमाल
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