घर Poetry (page 20)

अजीब सुब्ह थी दीवार ओ दर कुछ और से थे

ताबिश कमाल

मंज़िलों को नज़र में रक्खा है

ताबिश देहलवी

एक जल्वा ब-सद अंदाज़-ए-नज़र देख लिया

ताबिश देहलवी

बंद-ए-ग़म मुश्किल से मुश्किल-तर खुला

ताबिश देहलवी

उस रोज़ तुम कहाँ थे

तबस्सुम काश्मीरी

ए-के-शैख़ के पेट का कुत्ता

तबस्सुम काश्मीरी

मंज़िलों से बेगाना आज भी सफ़र मेरा

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

हम एक उम्र जले शम-ए-रहगुज़र की तरह

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

हम एक उम्र जले शम-ए-रहगुज़र की तरह

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

यार से अब के गर मिलूँ 'ताबाँ'

ताबाँ अब्दुल हई

नहीं कोई दोस्त अपना यार अपना मेहरबाँ अपना

ताबाँ अब्दुल हई

किसी गुल में नहीं पाने की तू बू-ए-वफ़ा हरगिज़

ताबाँ अब्दुल हई

किस से पूछूँ हाए मैं इस दिल के समझाने की तरह

ताबाँ अब्दुल हई

दिलबर से दर्द-ए-दिल न कहूँ हाए कब तलक

ताबाँ अब्दुल हई

अज़ीज़ाँ सितमगर न आया मिरे घर

ताबाँ अब्दुल हई

ऐसा कहाँ हुबाब कोई चश्म-ए-तर कि हम

ताबाँ अब्दुल हई

आरज़ू है मैं रखूँ तेरे क़दम पर गर जबीं

ताबाँ अब्दुल हई

मंज़िलों उस को आवाज़ देते रहे मंज़िलों जिस की कोई ख़बर भी न थी

ताब असलम

वहशत-ए-दिल ये बढ़ी छोड़ दिए घर सब ने

तअशशुक़ लखनवी

कभी तो शहीदों की क़ब्रों पे आओ

तअशशुक़ लखनवी

चला घर से वो बहर-ए-हुस्न अल्लाह रे कशिश दिल की

तअशशुक़ लखनवी

याद-ए-अय्याम कि हम-रुतबा-ए-रिज़वाँ हम थे

तअशशुक़ लखनवी

कब अपनी ख़ुशी से वो आए हुए हैं

तअशशुक़ लखनवी

दो दमों से है फ़क़त गोर-ए-ग़रीबाँ आबाद

तअशशुक़ लखनवी

ख़्वाबों की हक़ीक़त भी बता क्यूँ नहीं देते

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

दर्द सीने में कहीं चीख़ रहा हो जैसे

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

मैं बताता हूँ ज़वाल-ए-अहल-ए-यूरोप का प्लान

सय्यद ज़मीर जाफ़री

मेरा इंतिख़ाबी मंशूर

सय्यद ज़मीर जाफ़री

इक रेल के सफ़र की तस्वीर खींचता हूँ

सय्यद ज़मीर जाफ़री

यूँ क़त्ल-ए-आम नौ-ए-बशर कर दिया गया

सय्यद ज़मीर जाफ़री

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