गुल Poetry (page 24)

वामांदगी-ए-शौक़

शहरयार

शिकवा कोई दरिया की रवानी से नहीं है

शहरयार

किस फ़िक्र किस ख़याल में खोया हुआ सा है

शहरयार

जहाँ पे तेरी कमी भी न हो सके महसूस

शहरयार

आँख की ये एक हसरत थी कि बस पूरी हुई

शहरयार

तेरी तख़्लीक़ तिरा रंग हवाला था मिरा

शहनवाज़ ज़ैदी

याद के शहर मिरी जाँ से गुज़र

शाहिदा तबस्सुम

संग-ज़नों के वास्ते फिर नए रास्तों में है

शाहिदा तबस्सुम

मैं अपने हिस्से की तन्हाई महफ़िल से निकालूँगा

शाहिद ज़की

जिधर भी देखिए इक रास्ता बना हुआ है

शाहिद ज़की

कूज़ा-ए-दर्द में ख़ुशियों के समुंदर रख दे

शाहिद कमाल

कुछ यक़ीं सा गुमान सा कुछ है

शाहिद कमाल

जो इस चमन में ये गुल सर्व-ओ-यासमन के हैं

शाहिद कमाल

हर्फ़-ए-कुन शह-ए-रग-ए-हू में गुम है

शाहिद कमाल

फ़िक्र-ए-ईजाद में हूँ खोल नया दर कोई

शाहिद कमाल

अब्र लिखती है कहीं और घटा लिखती है

शाहिद कमाल

अंदर का सुकूत कह रहा है

शाहिद कबीर

शहर-ए-निगाराँ में फिरते हैं हम आवारा रात ढले

शाहिद इश्क़ी

महताब है न अक्स-ए-रुख़-ए-यार अब कोई

शाहिद इश्क़ी

लब तक जो न आया था वही हर्फ़-ए-रसा था

शाहिद इश्क़ी

लब तक जो न आया था वही हर्फ़-ए-रसा था

शाहिद इश्क़ी

हर मर्ग-ए-आरज़ू का निशाँ देर तक रहा

शाहिद इश्क़ी

फ़स्ल-ए-गुल तोहमत-ए-जुनूँ लाई

शाहिद इश्क़ी

महका है गुल-ए-ख़ून-ए-वफ़ा जानिए क्या हो

शाहिद अख़्तर

किसी की ज़ुल्फ़-ए-शिकन-दर-शिकन की बात हुई

शाहिद अख़्तर

ऐ निगार-ए-ग़म-ओ-आलाम तिरी उम्र दराज़

शाहिद अहमद शोएब

ये भी शायद तिरा ए'जाज़-ए-नज़र है ऐ दोस्त

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

मेरी चाहत पे न इल्ज़ाम लगाओ लोगो

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

ख़ाक-ए-दिल कहकशाँ से मिलती है

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

दुनिया ने बस थका ही दिया काम कम हुए

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

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