हाथ Poetry (page 20)

इस दौर के असर का जो पूछो बयाँ नहीं

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हमें याद आवती हैं बातें उस गुल-रू की रह रह के

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

देखा किसी ने हम से ज़माने ने क्या किया

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बे तिरे जान न थी जान मिरी जान के बीच

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

अजब अहवाल देखा इस ज़माने के अमीरों का

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ऐ दिल न कर तू फ़िक्र पड़ेगा बला के हाथ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

आज दिलबर के नाम को रट रट

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

साक़ी मय-ए-गुल-रंग मिरे लब से मिला देख

शैख़ मीर बख़्श मसरूर

वस्ल की शब में भी हम बाहम दिगर रोया किए

शैख़ करिमुद्दीन मुरादाबादी

रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश ख़याल लफ़्ज़-गरी

शहज़ाद क़ैस

पास रह कर भी न पहचान सका तू मुझ को

शहज़ाद अहमद

न मैं ने दस्त-शनासी का फिर किया दावा

शहज़ाद अहमद

गुज़रने ही न दी वो रात मैं ने

शहज़ाद अहमद

बे-हुनर हाथ चमकने लगा सूरज की तरह

शहज़ाद अहमद

ज़हरीली तख़्लीक़

शहज़ाद अहमद

सोता जागता साया

शहज़ाद अहमद

प्यार के रंग-महल बरसों में तय्यार हुए

शहज़ाद अहमद

मुंतज़िर दश्त-ए-दिल-ओ-जाँ है कि आहू आए

शहज़ाद अहमद

कोशिश है शर्त यूँही न हथियार फेंक दे

शहज़ाद अहमद

कमरों में छुपने के दिन हैं और न बरहना रातें हैं

शहज़ाद अहमद

इसी बाइस ज़माना हो गया है उस को घर बैठे

शहज़ाद अहमद

इस दोशीज़ा मिट्टी पर नक़्श-ए-कफ़-ए-पा कोई भी नहीं

शहज़ाद अहमद

इस दौर-ए-बे-दिली में कोई बात कैसे हो

शहज़ाद अहमद

फ़स्ल-ए-गुल ख़ाक हुई जब तो सदा दी तू ने

शहज़ाद अहमद

दिल बहुत मसरूफ़ था कल आज बे-कारों में है

शहज़ाद अहमद

अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है

शहज़ाद अहमद

इक बूँद ज़हर के लिए फैला रहे हो हाथ

शहरयार

ज़वाल की हद

शहरयार

ला-ज़वाल होने का

शहरयार

अब के बरस

शहरयार

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