हाथ Poetry (page 19)

मैं नज़र से पी रहा था तो ये दिल ने बद-दुआ दी

शकील बदायुनी

उन के बग़ैर हम जो गुलिस्ताँ में आ गए

शकील बदायुनी

तुम ने ये क्या सितम किया ज़ब्त से काम ले लिया

शकील बदायुनी

मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे

शकील बदायुनी

जो दिल पे गुज़रती है वो समझा नहीं सकते

शकील बदायुनी

जादा-ए-इश्क़ में गिर गिर के सँभलते रहना

शकील बदायुनी

ग़म-ए-आशिक़ी से कह दो रह-ए-आम तक न पहुँचे

शकील बदायुनी

बहार आई किसी का सामना करने का वक़्त आया

शकील बदायुनी

राह में घर के इशारे भी नहीं निकलेंगे

शकील आज़मी

फूल का शाख़ पे आना भी बुरा लगता है

शकील आज़मी

इंदिमाल

शकेब जलाली

मिरे ख़ुलूस की शिद्दत से कोई डर भी गया

शकेब जलाली

कनार-ए-आब खड़ा ख़ुद से कह रहा है कोई

शकेब जलाली

जाती है धूप उजले परों को समेट के

शकेब जलाली

आ के पत्थर तो मिरे सहन में दो चार गिरे

शकेब जलाली

सुन ली रामायन की जब पूरी कथा

शाइस्ता यूसुफ़

दाएरे

शाइस्ता हबीब

ताबे रज़ा का उस की अज़ल सीं किया मुझे

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मज़रा-ए-दुनिया में दाना है तो डर कर हाथ डाल

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दे के दिल उस के हाथ अपने हाथ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दे के दिल हाथ तिरे अपने हाथ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

चला जाता था 'हातिम' आज कुछ वाही-तबाही सा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बाज़ार से आए हाथ ख़ाली

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तुम्हारे इश्क़ में हम नंग-ओ-नाम भूल गए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तौबा ज़ाहिद की तौबा तल्ली है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मैं अपने दस्त पर शब ख़्वाब में देखा कि अख़गर था

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कलेजा मुँह को आया और नफ़स करने लगा तंगी

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जल्वा-गर फ़ानूस-ए-तन में है हमारा मन चराग़

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़ के शहर की कुछ आब-ओ-हवा और ही है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इस वास्ते निकलूँ हूँ तिरे कूचे से बच बच

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

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