हाथ Poetry (page 57)

ये कैसी बज़्म है और कैसे उस के साक़ी हैं

चकबस्त ब्रिज नारायण

मर्सिया गोपाल कृष्ण गोखले

चकबस्त ब्रिज नारायण

ज़बाँ को बंद करें या मुझे असीर करें

चकबस्त ब्रिज नारायण

मेरे ख़ामोश ख़ुदा

बुशरा एजाज़

मंज़रों के दरमियाँ मंज़र बनाना चाहिए

बुशरा एजाज़

बे-क़रारी दिल-ए-मुज़्तर की बढ़ाई हम ने

बबल्स होरा सबा

क्या करें जाम-ओ-सुबू हाथ पकड़ लेते हैं

बिस्मिल अज़ीमाबादी

अल्लाह तेरे हाथ है अब आबरू-ए-शौक़

बिस्मिल अज़ीमाबादी

मेरी दुआ कि ग़ैर पे उन की नज़र न हो

बिस्मिल अज़ीमाबादी

जब कभी नाम-ए-मोहम्मद लब पे मेरे आए है

बिस्मिल अज़ीमाबादी

अब मुलाक़ात कहाँ शीशे से पैमाने से

बिस्मिल अज़ीमाबादी

अब दम-ब-ख़ुद हैं नब्ज़ की रफ़्तार देख कर

बिस्मिल अज़ीमाबादी

वो: एक

बिमल कृष्ण अश्क

यूँ न जान अश्क हमें जो गया बाना न मिला

बिमल कृष्ण अश्क

जब चौदहवीं का चाँद निकलता दिखाई दे

बिमल कृष्ण अश्क

पाबंदियों से अपनी निकलते वो पा न थे

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

कब इक मक़ाम पे रुकती है सर-फिरी है हवा

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

जाने क्या कुछ है आज होने को

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

दीवार-ओ-दर में सिमटा इक लम्स काँपता है

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

धुँद

बिलाल अहमद

जाम-ए-गदाई हाथ में ले नित सांज-सवेरे फिरते हैं

भूरे ख़ान आशुफ़्ता

रहे न एक भी बेदाद-गर सितम बाक़ी

भारतेंदु हरिश्चंद्र

फ़साद-ए-दुनिया मिटा चुके हैं हुसूल-ए-हस्ती मिटा चुके हैं

भारतेंदु हरिश्चंद्र

दश्त-पैमाई का गर क़स्द मुकर्रर होगा

भारतेंदु हरिश्चंद्र

तुम्हारे हाथ ख़ाली जेब ख़ाली ज़ुल्फ़ ख़ाली थी

बेख़ुद देहलवी

वो देखते जाते हैं कनखियों से इधर भी

बेख़ुद देहलवी

तुम हमारे दिल-ए-शैदा को नहीं जानते क्या

बेख़ुद देहलवी

न क्यूँ-कर नज़्र दिल होता न क्यूँ-कर दम मिरा जाता

बेख़ुद देहलवी

क्या मिले आप की महफ़िल में भला एक से एक

बेख़ुद देहलवी

बेचने आए कोई क्या दिल-ए-शैदा ले कर

बेख़ुद देहलवी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.