हाथ Poetry (page 58)

अदू को देख के जब वो इधर को देखते हैं

बेख़ुद देहलवी

आशिक़ समझ रहे हैं मुझे दिल लगी से आप

बेख़ुद देहलवी

उदास काग़ज़ी मौसम में रंग ओ बू रख दे

बेकल उत्साही

तुम याद मुझे आ जाते हो

बहज़ाद लखनवी

गुल का किया जो चाक गरेबाँ बहार ने

बेदम शाह वारसी

नक़्श बर-दीवार

बेबाक भोजपुरी

राज़ है इबरत-असर फ़ितरत की हर तहरीर का

बेबाक भोजपुरी

चराग़-ए-हुस्न है रौशन किसी का

बयान मेरठी

ऐ जुनूँ हाथ के चलते ही मचल जाऊँगा

बयान मेरठी

ये आरज़ू है कि वो नामा-बर से ले काग़ज़

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

शौक़ को बे-अदब किया इश्क़ को हौसला दिया

बासित भोपाली

रुक गया हाथ तिरा क्यूँ 'बासिर'

बासिर सुल्तान काज़मी

हम जैसे तेग़-ए-ज़ुल्म से डर भी गए तो क्या

बासिर सुल्तान काज़मी

दूर साया सा है क्या फूलों में

बासिर सुल्तान काज़मी

बंधन सा इक बँधा था रग-ओ-पय से जिस्म में

बशीरुद्दीन अहमद देहलवी

इस बहर-ए-बे-सदा में कुछ और नीचे जाएँ

बशीर सैफ़ी

इक लम्हा भी गुज़ारूँ भला क्यूँ किसी के साथ

बशीर महताब

वो जिन के ज़िक्र से रगों में दौड़ती थीं बिजलियाँ

बशीर बद्र

तुम्हारे घर के सभी रास्तों को काट गई

बशीर बद्र

नाम पानी पे लिखने से क्या फ़ाएदा

बशीर बद्र

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला

बशीर बद्र

मैं तमाम तारे उठा उठा के ग़रीब लोगों में बाँट दूँ

बशीर बद्र

कोई फूल सा हाथ काँधे पे था

बशीर बद्र

कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से

बशीर बद्र

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

बशीर बद्र

शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ

बशीर बद्र

मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे

बशीर बद्र

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला

बशीर बद्र

मिरी नज़र में ख़ाक तेरे आइने पे गर्द है

बशीर बद्र

मेरे दिल की राख कुरेद मत इसे मुस्कुरा के हवा न दे

बशीर बद्र

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