हाथ Poetry (page 60)

उसी के ज़ुल्म से मैं हालत-ए-पनाह में था

बख़्श लाइलपूरी

दुनिया में इबादत को तिरी आए हुए हैं

बहराम जी

बहस क्यूँ है काफ़िर-ओ-दीं-दार की

बहराम जी

ऐ वाए इंक़लाब ज़माने के जौर से

ज़फ़र

याँ ख़ाक का बिस्तर है गले में कफ़नी है

ज़फ़र

सब रंग में उस गुल की मिरे शान है मौजूद

ज़फ़र

क़ारूँ उठा के सर पे सुना गंज ले चला

ज़फ़र

पान की सुर्ख़ी नहीं लब पर बुत-ए-ख़ूँ-ख़्वार के

ज़फ़र

न उस का भेद यारी से न अय्यारी से हाथ आया

ज़फ़र

करेंगे क़स्द हम जिस दम तुम्हारे घर में आवेंगे

ज़फ़र

काफ़िर तुझे अल्लाह ने सूरत तो परी दी

ज़फ़र

जब कभी दरिया में होते साया-अफ़गन आप हैं

ज़फ़र

हिज्र के हाथ से अब ख़ाक पड़े जीने में

ज़फ़र

हवा में फिरते हो क्या हिर्स और हवा के लिए

ज़फ़र

देखो इंसाँ ख़ाक का पुतला बना क्या चीज़ है

ज़फ़र

निशान-ए-ज़ख़्म पे निश्तर-ज़नी जो होने लगी

बद्र-ए-आलम ख़लिश

आसमाँ पर काले बादल छा गए

बद्र-ए-आलम ख़लिश

फ़िक्र-ए-अहल-ए-हुनर पे बैठी है

बद्र वास्ती

ये दिमाग़

अज़रा अब्बास

मेज़ पर रखे हाथ

अज़रा अब्बास

हाथ खोल दिए जाएँ

अज़रा अब्बास

बाज़ीगर

अज़रा अब्बास

अँधेरा

अज़रा अब्बास

कितने मौसम सरगर्दां थे मुझ से हाथ मिलाने में

अज़्म बहज़ाद

कितने मौसम सरगर्दां थे मुझ से हाथ मिलाने में

अज़्म बहज़ाद

दिल सोया हुआ था मुद्दत से ये कैसी बशारत जागी है

अज़्म बहज़ाद

न हाथ सूख के झड़ते हैं जिस्म से अपने

अज़लान शाह

सफ़र के ब'अद भी सफ़र का एहतिमाम कर रहा हूँ मैं

अज़लान शाह

कमाँ न तीर न तलवार अपनी होती है

अज़लान शाह

मुराजअत

अज़ीज़ तमन्नाई

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.