हाथ Poetry (page 66)

रवाँ है क़ाफ़िला-ए-जुस्तुजू किधर मेरा

असद जाफ़री

ग़ैरों को क्या पड़ी है कि रुस्वा करें मुझे

असअ'द बदायुनी

आते हैं बर्ग-ओ-बार दरख़्तों के जिस्म पर

असअ'द बदायुनी

यही नहीं कि मिरा घर बदलता जाता है

असअ'द बदायुनी

कहते हैं लोग शहर तो ये भी ख़ुदा का है

असअ'द बदायुनी

जिसे न मेरी उदासी का कुछ ख़याल आया

असअ'द बदायुनी

वो हाथ मार पलट कर जो कर दे काम तमाम

आरज़ू लखनवी

जोश-ए-जुनूँ में वो तिरे वहशी का चीख़ना

आरज़ू लखनवी

है मोहब्बत ऐसी बंधी गिरह जो न एक हाथ से खुल सके

आरज़ू लखनवी

यही इक निबाह की शक्ल है वो जफ़ा करें मैं वफ़ा करूँ

आरज़ू लखनवी

तड़पते दिल को न ले इज़्तिराब लेता जा

आरज़ू लखनवी

फेर जो पड़ना था क़िस्मत में वो हस्ब-ए-मामूल पड़ा

आरज़ू लखनवी

न कर तलाश-ए-असर तीर है लगा न लगा

आरज़ू लखनवी

क्यूँ किसी रह-रौ से पूछूँ अपनी मंज़िल का पता

आरज़ू लखनवी

जहाँ कि है जुर्म एक निगाह करना

आरज़ू लखनवी

दिल मुकद्दर है आईना-रू का

आरज़ू लखनवी

तक़दीर हो ख़राब तो तदबीर क्या करे

अरुण कुमार आर्य

दर्द के साँचे में ढल कर रह गई

अर्शी भोपाली

मुख़ालिफ़ों के जिलौ में वो आज शामिल था

अरशदुल क़ादरी

वो जिस ने मेरे दिल ओ जाँ में दर्द बोया है

अरशद सिद्दीक़ी

मैं ने उसी से हाथ मिलाया था और बस

अरशद महमूद अरशद

ख़ुदी के ज़ो'म में ऐसा वो मुब्तला हुआ है

अरशद महमूद अरशद

कहीं तो फेंक ही देंगे ये बार साँसों का

अरशद महमूद अरशद

किश्त-ए-एहसास में थोड़ा सा मिला लेंगे तुझे

अरशद जमाल 'सारिम'

यगाना उन का बेगाना है बेगाना यगाना है

अरशद अली ख़ान क़लक़

वा'दा-ख़िलाफ़ कितने हैं ऐ रश्क-ए-माह आप

अरशद अली ख़ान क़लक़

सितम वो तुम ने किए भूले हम गिला दिल का

अरशद अली ख़ान क़लक़

परतव पड़ा जो आरिज़-ए-गुलगून-ए-यार का

अरशद अली ख़ान क़लक़

न कल तक थे वो मुँह लगाने के क़ाबिल

अरशद अली ख़ान क़लक़

लूटे मज़े जो हम ने तुम्हारे उगाल के

अरशद अली ख़ान क़लक़

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