हुआ Poetry (page 53)

दस्त-ए-ज़रूरियात में बटता चला गया

शौकत फ़हमी

सब आसान हुआ जाता है

शारिक़ कैफ़ी

मंज़िलों पर हम मिलें ये तय हुआ

शारिक़ कैफ़ी

जिन पर मैं थोड़ा सा भी आसान हुआ हूँ

शारिक़ कैफ़ी

गुफ़्तुगू कर के परेशाँ हूँ कि लहजे में तिरे

शारिक़ कैफ़ी

फ़ासला रख के भी क्या हासिल हुआ

शारिक़ कैफ़ी

रोता हुआ बकरा

शारिक़ कैफ़ी

ख़ाक को मैं ख़्वार क्यूँ करता

शारिक़ कैफ़ी

जन्नत से दूर

शारिक़ कैफ़ी

जनाज़े में तो आओगे न मेरे

शारिक़ कैफ़ी

बीच भँवर से लौट आऊँगा

शारिक़ कैफ़ी

ये कुछ बदलाव सा अच्छा लगा है

शारिक़ कैफ़ी

वो दिन भी थे कि इन आँखों में इतनी हैरत थी

शारिक़ कैफ़ी

उदास हैं सब पता नहीं घर में क्या हुआ है

शारिक़ कैफ़ी

तरह तरह से मिरा दिल बढ़ाया जाता है

शारिक़ कैफ़ी

सामने तेरे हूँ घबराया हुआ

शारिक़ कैफ़ी

सब आसान हुआ जाता है

शारिक़ कैफ़ी

पहली बार वो ख़त लिक्खा था

शारिक़ कैफ़ी

निगाह नीची हुई है मेरी

शारिक़ कैफ़ी

कोई कुछ भी कहता रहे सब ख़ामोशी से सुन लेता है

शारिक़ कैफ़ी

कहीं न था वो दरिया जिस का साहिल था मैं

शारिक़ कैफ़ी

झूट पर उस के भरोसा कर लिया

शारिक़ कैफ़ी

इंतिहा तक बात ले जाता हूँ मैं

शारिक़ कैफ़ी

होने से मिरे फ़र्क़ ही पड़ता था भला क्या

शारिक़ कैफ़ी

गुज़र रहा है वो लम्हा तो याद आया है

शारिक़ कैफ़ी

बड़ा है दुख सो हासिल है ये आसानी मुझे

शारिक़ कैफ़ी

अजब शिकस्त का एहसास दिल पे छाया था

शारिक़ कैफ़ी

आइने का साथ प्यारा था कभी

शारिक़ कैफ़ी

जब आफ़्ताब की आग इस ज़मीं को चाटेगी

शारिक़ जमाल

शहर में इक क़त्ल की अफ़्वाह रौशन क्या हुई

शरीक़ अदील

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.