प्रेम Poetry (page 86)

नियाज़-ए-इश्क़ को समझा है क्या ऐ वाइज़-ए-नादाँ

असग़र गोंडवी

क्या क्या हैं दर्द-ए-इश्क़ की फ़ित्ना-तराज़ियाँ

असग़र गोंडवी

कुछ मिलते हैं अब पुख़्तगी-ए-इश्क़ के आसार

असग़र गोंडवी

'असग़र' हरीम-ए-इश्क़ में हस्ती ही जुर्म है

असग़र गोंडवी

ये नंग-ए-आशिक़ी है सूद ओ हासिल देखने वाले

असग़र गोंडवी

ये क्या कहा कि ग़म-ए-इश्क़ नागवार हुआ

असग़र गोंडवी

ये इश्क़ ने देखा है ये अक़्ल से पिन्हाँ है

असग़र गोंडवी

तिरे जल्वों के आगे हिम्मत-ए-शरह-ओ-बयाँ रख दी

असग़र गोंडवी

सामने उन के तड़प कर इस तरह फ़रियाद की

असग़र गोंडवी

न खुले उक़्दा-हा-ए-नाज़-ओ-नियाज़

असग़र गोंडवी

मता-ए-ज़ीस्त क्या हम ज़ीस्त का हासिल समझते हैं

असग़र गोंडवी

कौन था उस के हवा-ख़्वाहों में जो शामिल न था

असग़र गोंडवी

जीने का न कुछ होश न मरने की ख़बर है

असग़र गोंडवी

जान-ए-नशात हुस्न की दुनिया कहें जिसे

असग़र गोंडवी

हुस्न को वुसअतें जो दीं इश्क़ को हौसला दिया

असग़र गोंडवी

गुम कर दिया है दीद ने यूँ सर-ब-सर मुझे

असग़र गोंडवी

एक ऐसी भी तजल्ली आज मय-ख़ाने में है

असग़र गोंडवी

असरार-ए-इश्क़ है दिल-ए-मुज़्तर लिए हुए

असग़र गोंडवी

अक्स किस चीज़ का आईना-ए-हैरत में नहीं

असग़र गोंडवी

आशोब-ए-हुस्न की भी कोई दास्ताँ रहे

असग़र गोंडवी

आलाम-ए-रोज़गार को आसाँ बना दिया

असग़र गोंडवी

रुमूज़-ए-मोहब्बत

असर सहबाई

इश्क़ में शिकवा कुफ़्र है और हर इल्तिजा हराम

असर रामपुरी

वो जो नहीं हैं बज़्म में बज़्म की शान भी नहीं

असर रामपुरी

तस्कीन-ए-दिल को अश्क-ए-अलम क्या बहाऊँ मैं

असर लखनवी

निगह-ए-शौक़ को यूँ आइना-सामानी दे

असर लखनवी

न शरह-ए-शौक़ न तस्कीन जान-ए-ज़ार में है

असर लखनवी

दिल इश्क़ की मय से छलक रहा है

असर लखनवी

ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा होगा

असद भोपाली

जो अक्स-ए-यार तह-ए-आब देख सकते हैं

असअ'द बदायुनी

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