जिन्न Poetry (page 38)

अक़्ल थक कर लौट आई जादा-ए-आलाम से

आमिर उस्मानी

लौटे कुछ इस तरह तिरी जल्वा-सरा से हम

आमिर उस्मानी

हक़ीर ख़ाक के ज़र्रे थे आसमान हुए

आमिर उस्मानी

दर्द बढ़ता गया जितने दरमाँ किए प्यास बढ़ती गई जितने आँसू पिए

आमिर उस्मानी

जबीं को चैन कहाँ ज़ेर-ए-लब दुआ है बस

आमिर नज़र

तेरी इनायतों का अजब रंग ढंग था

अमीर हम्ज़ा साक़िब

मिरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा

अमीर क़ज़लबाश

मिरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा

अमीर क़ज़लबाश

कुछ ख़ार ही नहीं मिरे दामन के यार हैं

अमीर मीनाई

हम-सर-ए-ज़ुल्फ़ क़द-ए-हूर-ए-शमाइल ठहरा

अमीर मीनाई

तशन्नुज

अमीक़ हनफ़ी

'अमीक़' छेड़ ग़ज़ल ग़म की इंतिहा कब है

अमीक़ हनफ़ी

देख कोह-ए-ना-रसा बन कर भरम रक्खा तिरा

अमीन राहत चुग़ताई

कल एक शख़्स जो अच्छे-भले लिबास में था

अमर सिंह फ़िगार

सबा की बात सुनें फूल से कलाम करें

अल्ताफ़ परवाज़

इश्क़ को तर्क-ए-जुनूँ से क्या ग़रज़

अल्ताफ़ हुसैन हाली

वो मसाफ़-ए-जीस्त में हर मोड़ पर तन्हा रहा

अलक़मा शिबली

ज़माना अक़्ल को समझा हुआ है मिशअल-ए-राह

अल्लामा इक़बाल

वो हर्फ़-ए-राज़ कि मुझ को सिखा गया है जुनूँ

अल्लामा इक़बाल

मिरे जुनूँ ने ज़माने को ख़ूब पहचाना

अल्लामा इक़बाल

मार्च 1907

अल्लामा इक़बाल

इबलीस की मजलिस-ए-शूरा

अल्लामा इक़बाल

फ़रमान-ए-ख़ुदा

अल्लामा इक़बाल

ये कौन ग़ज़ल-ख़्वाँ है पुर-सोज़ ओ नशात-अंगेज़

अल्लामा इक़बाल

ये दैर-ए-कुहन क्या है अम्बार-ए-ख़स-ओ-ख़ाशाक

अल्लामा इक़बाल

वो हर्फ़-ए-राज़ कि मुझ को सिखा गया है जुनूँ

अल्लामा इक़बाल

समा सकता नहीं पहना-ए-फ़ितरत में मिरा सौदा

अल्लामा इक़बाल

ख़ुदी वो बहर है जिस का कोई किनारा नहीं

अल्लामा इक़बाल

ख़िरद ने मुझ को अता की नज़र हकीमाना

अल्लामा इक़बाल

कमाल-ए-जोश-ए-जुनूँ में रहा मैं गर्म-ए-तवाफ़

अल्लामा इक़बाल

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