भगवान Poetry (page 17)

आसमाँ था तुम थे या मेरा सितारा कौन था

शकील जाज़िब

मसअला ख़त्म हुआ चाहता है

शकील जमाली

न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता है

शकील बदायुनी

आप जो कुछ कहें हमें मंज़ूर

शकील बदायुनी

ज़मीं पर फ़स्ल-ए-गुल आई फ़लक पर माहताब आया

शकील बदायुनी

तिरी महफ़िल से उठ कर इश्क़ के मारों पे क्या गुज़री

शकील बदायुनी

रंग-ए-सनम-कदा जो ज़रा याद आ गया

शकील बदायुनी

राह-ए-ख़ुदा में आलम-ए-रिन्दाना मिल गया

शकील बदायुनी

नग़्मा-ए-इश्क़ सुनाता हूँ मैं इस शान के साथ

शकील बदायुनी

न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता है

शकील बदायुनी

मिरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहीं

शकील बदायुनी

कोई आरज़ू नहीं है कोई मुद्दआ' नहीं है

शकील बदायुनी

जीने वाले क़ज़ा से डरते हैं

शकील बदायुनी

बदले बदले मिरे ग़म-ख़्वार नज़र आते हैं

शकील बदायुनी

अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे

शकील बदायुनी

अब तक शिकायतें हैं दिल-ए-बद-नसीब से

शकील बदायुनी

आख़िरी वक़्त है आख़िरी साँस है ज़िंदगी की है शाम आख़िरी आख़िरी

शकील बदायुनी

मुझ को बिखराया गया और समेटा भी गया

शकील आज़मी

एक सुराख़ सा कश्ती में हुआ चाहता है

शकील आज़मी

अपनी हस्ती को मिटा दूँ तिरे जैसा हो जाऊँ

शकील आज़मी

वक़्त की डोर ख़ुदा जाने कहाँ से टूटे

शकेब जलाली

रुख़्सार आज धो कर शबनम ने पंखुड़ी के

शकेब जलाली

कोई इस दिल का हाल क्या जाने

शकेब जलाली

आ के पत्थर तो मिरे सहन में दो चार गिरे

शकेब जलाली

सुन ली रामायन की जब पूरी कथा

शाइस्ता यूसुफ़

मैं रिवायत हूँ एक भूली हुई

शाइस्ता यूसुफ़

जुनून-ए-इश्क़ की आमादगी ने कुछ न दिया

शाइस्ता सहर

समझते हम नहीं जो तुम इशारों बीच कहते हो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

रखता है इबादत के लिए हसरत-ए-जन्नत

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मुद्दत से आरज़ू है ख़ुदा वो घड़ी करे

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

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