भगवान Poetry (page 62)

देखें महशर में उन से क्या ठहरे

आरज़ू लखनवी

मिरे जोश-ए-ग़म की है अजब कहानी

आरज़ू लखनवी

करम उन का ख़ुद है बढ़ कर मिरी हद्द-ए-इल्तिजा से

आरज़ू लखनवी

कहीं सर पटकते दीवाने कहीं पर झुलसते परवाने

आरज़ू लखनवी

जो बुत है यहाँ अपनी जा एक ही है

आरज़ू लखनवी

दिल मुकद्दर है आईना-रू का

आरज़ू लखनवी

देखें महशर में उन से क्या ठहरे

आरज़ू लखनवी

आग़ाज़-ए-आशिक़ी का अल्लाह रे ज़माना

अर्शी भोपाली

ख़ुदी के ज़ो'म में ऐसा वो मुब्तला हुआ है

अरशद महमूद अरशद

ज़िम्मेदारी

अरशद कमाल

ज़माना कुछ भी कहे तेरी आरज़ू कर लूँ

अरशद कमाल

उस का अंजाम भला हो कि बुरा हो कुछ हो

अरशद जमाल हश्मी

आँखों में ख़्वाब रख दिए ता'बीर छीन ली

अरशद जमाल हश्मी

बुत-परस्ती में भी भूली न मुझे याद-ए-ख़ुदा

अरशद अली ख़ान क़लक़

यार के नर्गिस-ए-बीमार का बीमार रहा

अरशद अली ख़ान क़लक़

सोते हैं फैल फैल के सारे पलंग पर

अरशद अली ख़ान क़लक़

शरफ़ इंसान को कब ज़िल्ल-ए-हुमा देता है

अरशद अली ख़ान क़लक़

साफ़ बातों से हो गया मा'लूम

अरशद अली ख़ान क़लक़

हम ने एहसान असीरी का न बर्बाद किया

अरशद अली ख़ान क़लक़

आश्ना होते ही उस इश्क़ ने मारा मुझ को

अरशद अली ख़ान क़लक़

आशिक़-ए-गेसू-ओ-क़द तेरे गुनहगार हैं सब

अरशद अली ख़ान क़लक़

आरिज़ में तुम्हारे क्या सफ़ा है

अरशद अली ख़ान क़लक़

आएँगे वो तो आप में हरगिज़ न आएँगे

अरशद अली ख़ान क़लक़

हम कि मायूस नहीं हैं उन्हें पा ही लेंगे

अर्श सिद्दीक़ी

संग-ए-दर उस का हर इक दर पे लगा मिलता है

अर्श सिद्दीक़ी

तौबा तौबा ये बला-ख़ेज़ जवानी तौबा

अर्श मलसियानी

पहला सा वो जुनून-ए-मोहब्बत नहीं रहा

अर्श मलसियानी

नैरंगी-ए-बहार-ओ-ख़िज़ाँ देखते रहे

अर्श मलसियानी

इश्क़-ए-बुताँ का ले के सहारा कभी कभी

अर्श मलसियानी

अगर तक़दीर तेरी बाइस-ए-आज़ार हो जाए

अर्श मलसियानी

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