खुशबू Poetry (page 5)

शिद्दत-ए-शौक़ असर-ख़ेज़ है जादू की तरह

वाहिद प्रेमी

मिज़्गाँ पे आज यास के मोती बिखर गए

वहीदा नसीम

सुकूत-ए-शब सितारों से हवा जब बात करती है

विश्मा ख़ान विश्मा

मैं इंसाँ था ख़ुदा होने से पहले

विशाल खुल्लर

अब कहाँ दर्द जिस्म-ओ-जान में है

विजय शर्मा अर्श

संकरी सी गली

वर्षा गोरछिया

अक्सर तन्हाई से मिल कर रोए हैं

उषा भदोरिया

मेघा

उरूज जाफ़री

आज अचानक फिर ये कैसी ख़ुशबू फैली यादों की

उनवान चिश्ती

मक़्तल-ए-जाँ से कि ज़िंदाँ से कि घर से निकले

उम्मीद फ़ाज़ली

मक़्तल-ए-जाँ से कि ज़िंदाँ से कि घर से निकले

उम्मीद फ़ाज़ली

हम तिरा अहद-ए-मोहब्बत ठहरे

उम्मीद फ़ाज़ली

वो तो मिल कर भी नहीं मिलती है

त्रिपुरारि

तजरबा जो भी है मेरा मैं वही लिखता हूँ

त्रिपुरारि

अश्क-दर-अश्क वही लोग रवाँ मिलते हैं

त्रिपुरारि

सुनो कवी तौसीफ़ तबस्सुम इस दुख से क्या पाओगे

तौसीफ़ तबस्सुम

क्या बताऊँ कि है किस ज़ुल्फ़ का सौदा मुझ को

तौसीफ़ तबस्सुम

आख़िर ख़ुद अपने ही लहू में डूब के सर्फ़-ए-विग़ा होगे

तौसीफ़ तबस्सुम

वो रंग-रूप मसाफ़त की धूल चाट गई

तौक़ीर रज़ा

वो जो इक इल्ज़ाम था उस पर कहीं

तौक़ीर रज़ा

सदाक़त सादगी ओढ़े बुलंदी थाम लेती है

ताैफ़ीक़ साग़र

रेशम रेशम तितली देखूँ ख़्वाब-नगर की वादी में

ताैफ़ीक़ साग़र

मिरी सच्चाई हर सूरत तिरी मुट्ठी से निकलेगी

ताैफ़ीक़ साग़र

फ़क़ीरों का चलन यूँ जिस्म के अंदर महकता है

ताैफ़ीक़ साग़र

फिर तिरे हिज्र के जज़्बात ने अंगड़ाई ली

तसनीम फ़ारूक़ी

अक्स-ए-ज़ंजीर पे जाँ देने के पहलू दूँगा

तसनीम फ़ारूक़ी

ख़्वाब पहले ले गया फिर रत-जगा भी ले गया

तस्लीम इलाही ज़ुल्फ़ी

जौन-एलिया से आख़री मुलाक़ात

तारिक़ क़मर

अब नए रुख़ से हक़ाएक़ को उलट कर देखो

तारिक़ बट

आज भी 'सिपरा' उस की ख़ुश्बू मिल मालिक ले जाता है

तनवीर सिप्रा

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