लोग Poetry (page 8)

बदन में रूह की तर्सील करने वाले लोग

तौक़ीर तक़ी

चल कर कभी हमारे अंधेरे भी देखिए

तसनीम फ़ारूक़ी

ख़ुदा के नाम पे जिस तरह लोग मर रहे हैं

तसनीम आबिदी

हमारी क़ुर्बतों में फ़ासला न रह जाए

तसनीम आबिदी

जैसे कश्ती और उस पर बादबाँ फैले हुए

तस्लीम इलाही ज़ुल्फ़ी

जैसे कश्ती और इस पर बादबाँ फैले हुए

तस्लीम इलाही ज़ुल्फ़ी

अच्छे हैं फ़ासले के ये तारे सजाते हैं

तासीर सिद्दीक़ी

अपने दम से गुज़र औक़ात नहीं करता मैं

तरकश प्रदीप

वो लोग भी तो किनारों पे आ के डूब गए

तारिक़ क़मर

क्या अजब लोग थे गुज़रे हैं बड़ी शान के साथ

तारिक़ क़मर

कैसे रिश्तों को समेटें ये बिखरते हुए लोग

तारिक़ क़मर

ये रोज़-ओ-शब की मसाफ़त ये आना जाना मिरा

तारिक़ क़मर

सारे ज़ख़्मों को ज़बाँ मिल गई ग़म बोलते हैं

तारिक़ क़मर

कैसे रिश्तों को समेटें ये बिखरते हुए लोग

तारिक़ क़मर

बड़ी हवेली के तक़्सीम जब उजाले हुए

तारिक़ क़मर

निकले लोग सफ़र पर शब के जंगल में

तारिक़ पीरज़ादा

अजब नहीं दर-ओ-दीवार जैसे हो जाएँ

तारिक़ नईम

ब-नाम-ए-इश्क़ यही एक काम करते हैं

तारिक़ नईम

यहाँ के लोग हैं बस अपने ही ख़याल में गुम

तारिक़ मतीन

निरवान

ताऊस

दिलों में बुग़्ज़ के ख़ाने न होते

तनवीर गौहर

अहबाब हो गए हैं बहुत मुझ से बद-गुमान

तनवीर सामानी

हमारे वास्ते हर आरज़ू काँटों की माला है

तनवीर नक़वी

कई लोग मोरचा-बंद ख़ौफ़ की रेत में हैं करम करम

तनवीर मोनिस

तिरी चाल धुन तिरी साँस सुर मिरे दिल को आ के सँभाल भी

तनवीर मोनिस

शहरों के सारे जंगल गुंजान हो गए हैं

तनवीर अंजुम

हम दोनों में से एक

तनवीर अंजुम

हमें वो क्यूँ याद आ रहे हैं

तनवीर अंजुम

चार साल बा'द

तनवीर अंजुम

शहरों के सारे जंगल गुंजान हो गए हैं

तनवीर अंजुम

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