गंतव्य Poetry (page 12)

जो देखते हुए नक़्श-ए-क़दम गए होंगे

शमीम करहानी

हमीं थे ऐसे सर-फिरे हमीं थे ऐसे मनचले

शमीम करहानी

गली गली है अंधेरा तो मेरे साथ चलो

शमीम करहानी

अनमोल सही नायाब सही बे-दाम-ओ-दिरम बिक जाते हैं

शमीम करहानी

तिरा जल्वा निहायत दिल-नशीं है

शमीम जयपुरी

रौशनी लेने चले थे और अंधेरे छा गए

शमीम जयपुरी

गो तही-दामन हूँ लेकिन ग़म नहीं

शमीम जयपुरी

हिज्र का क़िस्सा बहुत लम्बा नहीं बस रात भर है

शमीम हनफ़ी

अब क़ैस है कोई न कोई आबला-पा है

शमीम हनफ़ी

कौन सा शो'ला लपकता है ये महमिल के क़रीब

शमीम फ़तेहपुरी

ये किस का जल्वा-ए-हैरत-फ़ज़ा निगाह में है

शकूर जावेद

निगाह ओ दिल के तमाम रिश्ते फ़ज़ा-ए-आलम से कट गए हैं

शकील जाज़िब

जाँ के ज़ियाँ को ग़म की तलाफ़ी समझ लिया

शकील जाज़िब

हासिल-ए-उम्र है जो एक कसक बाक़ी है

शकील जाज़िब

आसमाँ था तुम थे या मेरा सितारा कौन था

शकील जाज़िब

ख़्वाबों की रहगुज़र से ख़यालों की राह से

शकील ग्वालिआरी

मुझे आ गया यक़ीं सा कि यही है मेरी मंज़िल

शकील बदायुनी

नुमाइश-ए-अलीगढ़

शकील बदायुनी

ज़िंदगी उन की चाह में गुज़री

शकील बदायुनी

ज़िंदगी उन की चाह में गुज़री

शकील बदायुनी

ये ऐश-ओ-तरब के मतवाले बे-कार की बातें करते हैं

शकील बदायुनी

वो दिल में रहते हैं दिल का निशाँ नहीं मा'लूम

शकील बदायुनी

सरगुज़िश्त-ए-दिल को रूदाद-ए-जहाँ समझा था मैं

शकील बदायुनी

नज़र से क़ैद-ए-तअय्युन उठाई जाती है

शकील बदायुनी

न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता है

शकील बदायुनी

मिरी ज़िंदगी है ज़ालिम तिरे ग़म से आश्कारा

शकील बदायुनी

लतीफ़ पर्दों से थे नुमायाँ मकीं के जल्वे मकाँ से पहले

शकील बदायुनी

किसी को जब निगाहों के मुक़ाबिल देख लेता हूँ

शकील बदायुनी

करने दो अगर क़त्ताल-ए-जहाँ तलवार की बातें करते हैं

शकील बदायुनी

कहीं हुस्न का तक़ाज़ा कहीं वक़्त के इशारे

शकील बदायुनी

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