उम्र Poetry (page 12)

कल सीं बे-कल है मिरा जी यार कूँ देखा न था

सिराज औरंगाबादी

हर हर वरक़ पे क्यूँ कि लिखूँ दास्तान-ए-हिज्र

सिराज औरंगाबादी

दो-रंगी ख़ूब नईं यक-रंग हो जा

सिराज औरंगाबादी

आलम के दोस्तों में मुरव्वत नहीं रही

सिराज औरंगाबादी

क्या दास्ताँ थी पहले बयाँ ही नहीं हुई

सिराज अजमली

जलने में क्या लुत्फ़ है ये तो पूछो तुम परवाने से

सिकंदर हयात ख़याल

कैफ़ जो रूह पे तारी है तुझे क्या मालूम

सिकंदर अली वज्द

लकड़ी की दो मेज़ें हैं इक लोहे की अलमारी है

सिदरा सहर इमरान

हूँ किस मक़ाम पे दिल में तिरे ख़बर न लगे

सिद्दीक़ शाहिद

हर इक क़दम पे ज़ख़्म नए खाए किस तरह

सिब्त अली सबा

आँधी चली तो गर्द से हर चीज़ अट गई

सिब्त अली सबा

हमारे दिल के आईने में है तस्वीर नानक की

श्याम सुंदर लाल बर्क़

अबस है दूरी का उस के शिकवा बग़ल में अपने वो दिल-रुबा है

श्याम सुंदर लाल बर्क़

बेजा न था उठ बैठना बेचैनी से मेरा

शऊर बलगिरामी

ख़ुदा ने चाहा तो सब इंतिज़ाम कर देंगे

शुजा ख़ावर

इस कशाकश में यहाँ उम्र-ए-रवाँ गुज़रे है

शोरिश काश्मीरी

वो जिस के दिल में निहाँ दर्द दो-जहाँ का था

शोला हस्पानवी

वो और होंगे जो वहम-ओ-गुमाँ के साथ चले

शोला हस्पानवी

राज़-ए-फ़ितरत निहाँ था निहाँ है अभी

शोला हस्पानवी

अपना ख़ालिक़ ख़ुद ही था मेरा ख़ुदा कोई न था

शोला हस्पानवी

वो पास आए आस बने और पलट गए

शोहरत बुख़ारी

वो पास आए आस बने और पलट गए

शोहरत बुख़ारी

मैं ने ही न कुछ खोया जो पाया न किसी को

शोहरत बुख़ारी

जाने क्या बात है मानूस बहुत लगता है

शोहरत बुख़ारी

इक उम्र फ़साने ग़म-ए-जानाँ के गढ़े हैं

शोहरत बुख़ारी

बे-नश्शा बहक रहा हूँ कब से

शोहरत बुख़ारी

दिल-ए-आबाद का बर्बाद भी होना ज़रूरी है

शोएब बिन अज़ीज़

गीली मिट्टी से बदन बनते हुए उम्र लगी

शमशाद शाद

सुकूँ-अफ़ज़ा बहुत है दर्द-ए-उल्फ़त

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

ख़ून-ए-दिल होता रहा ख़ून-ए-जिगर होता रहा

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.