उम्र Poetry (page 13)

फिर मिरी आँख तिरी याद से भर आई है

शिव चरन दास गोयल ज़ब्त

तीस दिन के लिए तर्क-ए-मय-ओ-साक़ी कर लूँ

शिबली नोमानी

वो जब तक अंजुमन में जल्वा फ़रमाने नहीं आते

शेर सिंह नाज़ देहलवी

दम-ए-अख़ीर भी हम ने ज़बाँ से कुछ न कहा

शेर सिंह नाज़ देहलवी

बातों में ढूँडते हैं वो पहलू मलाल का

शेर सिंह नाज़ देहलवी

बातों में ढूँडते हैं वो पहलू मलाल का

शेर सिंह नाज़ देहलवी

क़िस्सा तो ज़ुल्फ़-ए-यार का तूल ओ तवील है

शेर मोहम्मद ख़ाँ ईमान

किस रोज़ इलाही वो मिरा यार मिलेगा

शेर मोहम्मद ख़ाँ ईमान

ज़िंदगी रैन-बसेरे के सिवा कुछ भी नहीं

शेर अफ़ज़ल जाफ़री

नुत्क़ पलकों पे शरर हो तो ग़ज़ल होती है

शेर अफ़ज़ल जाफ़री

हो उम्र-ए-ख़िज़्र भी तो हो मालूम वक़्त-ए-मर्ग

ज़ौक़

अज़ीज़ो इस को न घड़ियाल की सदा समझो

ज़ौक़

ऐ शम्अ तेरी उम्र-ए-तबीई है एक रात

ज़ौक़

निगह का वार था दिल पर फड़कने जान लगी

ज़ौक़

मज़ा था हम को जो लैला से दू-ब-दू करते

ज़ौक़

लेते ही दिल जो आशिक़-ए-दिल-सोज़ का चले

ज़ौक़

लाई हयात आए क़ज़ा ले चली चले

ज़ौक़

दरिया-ए-अश्क चश्म से जिस आन बह गया

ज़ौक़

अज़ीज़ो इस को न घड़ियाल की सदा समझो

ज़ौक़

सुख़न किया जो ख़मोशी से शायरी जागी

शहपर रसूल

मेरी नज़र का मुद्दआ उस के सिवा कुछ भी नहीं

शहपर रसूल

था ग़ैर का जो रंज-ए-जुदाई तमाम शब

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

शोख़ी ने तेरी लुत्फ़ न रक्खा हिजाब में

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

मैं वस्ल में भी 'शेफ़्ता' हसरत-तलब रहा

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

दिल लिया जिस ने बेवफ़ाई की

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

निकले कभी न घर से मगर इस के बावजूद

शीन काफ़ निज़ाम

मौज-ए-हवा तो अब के अजब काम कर गई

शीन काफ़ निज़ाम

इक साएँ साएँ घेरे है गिरते मकान को

शीन काफ़ निज़ाम

आँखों में रात ख़्वाब का ख़ंजर उतर गया

शीन काफ़ निज़ाम

दिल-ओ-निगाह के हुस्न-ओ-क़रार का मौसम

शाज़िया अकबर

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