उम्र Poetry (page 16)

चाँद-सूरज न सही एक दिया हूँ मैं भी

शाइक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

रिश्ता-ए-उमर-दराज़ अपना मैं कोताह करूँ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इस क़दर की सर्फ़ तस्ख़ीर-ए-परी-रूयाँ में उम्र

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

था पास अभी किधर गया दिल

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तिरा दिल यार अगर माइल करे है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

सच अगर पूछो तो ना-पैदा है यक-रू आश्ना

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ने शिकवा-मंद दिल से न अज़-दस्त-दीदा हूँ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

न तन में उस्तुख़्वान ने रग रही है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कोई देता नहीं है दाद बे-दाद

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जो मिरे हम-अस्र हम-सोहबत थे सो सब मर गए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जो कोई कि यार-ओ-आश्ना है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जब आप से ही गुज़र गए हम

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

फ़िक्र में मुफ़्त उम्र खोना है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दुनिया ख़याल-ओ-ख़्वाब है मेरी निगाह में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

देखते सज्दे में आता है जो करता है निगाह

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

देख बुनियाद रब की आदम है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इस दश्त की वुसअत में सिमट कर नहीं देखा

शहज़ाद क़मर

मिरा नहीं तो वो अपना ही कुछ ख़याल करे

शहज़ाद नय्यर

तमाम उम्र हवा फांकते हुए गुज़री

शहज़ाद अहमद

आज़ाद था मिज़ाज तो क्यूँ घर बना लिया

शहज़ाद अहमद

यूँ ख़ाक की मानिंद न राहों पे बिखर जा

शहज़ाद अहमद

ये सोच कर कि तेरी जबीं पर न बल पड़े

शहज़ाद अहमद

वो जा चुका है तो क्यूँ बे-क़रार इतने हो

शहज़ाद अहमद

मेरी ख़ातिर देर न करना और सफ़र करते जाना

शहज़ाद अहमद

लगे थे ग़म तुझे किस उम्र में ज़माने के

शहज़ाद अहमद

कहीं भी साया नहीं किस तरफ़ चले कोई

शहज़ाद अहमद

जो दिल में खटकती है कभी कह भी सकोगे

शहज़ाद अहमद

जल भी चुके परवाने हो भी चुकी रुस्वाई

शहज़ाद अहमद

जब उस की ज़ुल्फ़ में पहला सफ़ेद बाल आया

शहज़ाद अहमद

जब आफ़्ताब न निकला तो रौशनी के लिए

शहज़ाद अहमद

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