उम्र Poetry (page 23)

अजनबी हैरान मत होना कि दर खुलता नहीं

सलीम कौसर

अभी हैरत ज़ियादा और उजाला कम रहेगा

सलीम कौसर

तिरी तलाश में गुज़रे कई ज़माने मुझे

सलीम काशीर

तिरी निगाह की जब से मुआवनत न रही

सलीम फ़राज़

हर-चंद मिरा शौक़-ए-सफ़र यूँ न रहेगा

सलीम फ़राज़

फ़स्ल-ए-जुनूँ में दामन-ओ-दिल चाक भी नहीं

सलीम फ़राज़

इक एक लफ़्ज़ में कई पहलू कहाँ से आए

सलीम फ़राज़

अच्छा था कोई ख़्वाब नज़र में न पालते

सलीम फ़राज़

पड़ा हुआ मैं किसी आइने के घर में हूँ

सलीम बेताब

क़ुर्ब-ए-बदन से कम न हुए दिल के फ़ासले

सलीम अहमद

क़िस्सा छेड़ा मेहर ओ वफ़ा का अव्वल-ए-शब उन आँखों ने

सलीम अहमद

इक आग सी जलती रही ता-उम्र लहू में

सलीम अहमद

वस्ल ओ फ़स्ल की हर मंज़िल में शामिल इक मजबूरी थी

सलीम अहमद

न पूछो अक़्ल की चर्बी चढ़ी है उस की बोटी पर

सलीम अहमद

मजबूरियों का पास भी कुछ था वफ़ा के साथ

सलीम अहमद

कोई सितारा-ए-गिर्दाब आश्ना था मैं

सलीम अहमद

बज़्म आख़िर हुई शम्ओं' का धुआँ बाक़ी है

सलीम अहमद

आँखों में सितारे से चमकते रहे ता-देर

सलीम अहमद

तरब-आफ़रीं है कितना सर-ए-शाम ये नज़ारा

सलाम संदेलवी

ये धरती ख़ूब-सूरत है

सलाम मछली शहरी

फ़सील-ए-शहर को जब तक गिरा नहीं देंगे

सलाहुद्दीन नय्यर

वो आशिक़ हैं कि मरने पर हमारे

सख़ी लख़नवी

'सख़ी' से छूट कर जाएँगे घर आप

सख़ी लख़नवी

दिल उसे दे दिया 'सख़ी' ही तो है

सख़ी लख़नवी

रात हिस्सा है मिरी उम्र का जी लेने दे

शख़ावत शमीम

रौशनी दर पे खड़ी मुझ को बुलाती क्यूँ है

शख़ावत शमीम

सर से जुनून-ए-इश्क़ का सौदा निकालिए

सज्जाद बाक़र रिज़वी

नुमायाँ और भी रुख़ तेरी बे-रुख़ी में रहे

सज्जाद बाक़र रिज़वी

मैं हम-नफ़साँ जिस्म हूँ वो जाँ की तरह था

सज्जाद बाक़र रिज़वी

मैं हम-नफ़साँ जिस्म हूँ वो जाँ की तरह था

सज्जाद बाक़र रिज़वी

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