उम्र Poetry (page 22)

तमाम उम्र की तन्हाइयों पे भारी थी

सलीम शुजाअ अंसारी

सालिम यक़ीन-ए-अज़्मत-ए-सेहर-ए-ख़ुदा न तोड़

सलीम शुजाअ अंसारी

कभी मिली है जो फ़ुर्सत तो ये हिसाब किया

सलीम शुजाअ अंसारी

ज़माँ मकाँ से भी कुछ मावरा बनाने में

सालिम सलीम

कनार-ए-आब तिरे पैरहन बदलने का

सालिम सलीम

हुदूद-ए-शहर-ए-तिलिस्मात से नहीं निकला

सालिम सलीम

हंगामा-ए-सुकूत बपा कर चुके हैं हम

सालिम सलीम

ग़म-ए-हयात मिटाना है रो के देखते हैं

सलीम सिद्दीक़ी

क़ाइल करूँ किस बात से मैं तुझ को सितमगर

सलीम शाहिद

मुर्दा रगों में ख़ून की गर्मी कहाँ से आई

सलीम शाहिद

मिरी थकन मिरे क़स्द-ए-सफ़र से ज़ाहिर है

सलीम शाहिद

मंज़र मिरी आँखों में रहे दश्त-ए-सफ़र के

सलीम शाहिद

क्या मेरा इख़्तियार ज़मान-ओ-मकान पर

सलीम शाहिद

खुलती है गुफ़्तुगू से गिरह पेच-ओ-ताब की

सलीम शाहिद

अब शहर की और दश्त की है एक कहानी

सलीम शाहिद

तिरी निगाह की जब से मुआ'विनत न रही

सलीम सरफ़राज़

सफ़र से आए तो फिर इक सफ़र नसीब हुआ

सलीम सरफ़राज़

रंग-ए-ख़ुलूस गंग-ओ-जमन में नहीं रहा

सलीम सरफ़राज़

अच्छा था कोई ख़्वाब नज़र में न पालते

सलीम सरफ़राज़

तमाम उम्र सितारे तलाश करता फिरा

सलीम कौसर

इंतिज़ार और दस्तकों के दरमियाँ कटती है उम्र

सलीम कौसर

भला वो हुस्न किस की दस्तरस में आ सका है

सलीम कौसर

वुसअत है वही तंगी-अफ़्लाक वही है

सलीम कौसर

तिलिस्म-ख़ाना-ए-अस्बाब मेरे सामने था

सलीम कौसर

तारे जो कभी अश्क-फ़िशानी से निकलते

सलीम कौसर

न इस तरह कोई आया है और न आता है

सलीम कौसर

कोई याद ही रख़्त-ए-सफ़र ठहरे कोई राहगुज़र अनजानी हो

सलीम कौसर

कभी मौसम साथ नहीं देते कभी बेल मुंडेर नहीं चढ़ती

सलीम कौसर

इस आलम-ए-हैरत-ओ-इबरत में कुछ भी तो सराब नहीं होता

सलीम कौसर

बदल गया है सभी कुछ उस एक साअत में

सलीम कौसर

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