उम्र Poetry (page 21)
भर जाएँगे जब ज़ख़्म तो आऊँगा दोबारा
सरवत हुसैन
एक वजूदी दोस्त के नाम
सरमद सहबाई
मरने का पता दे मिरे जीने का पता दे
सरमद सहबाई
वो भी न आया उम्र-ए-गुज़िश्ता के मिस्ल ही
सरफ़राज़ ख़ालिद
तमाम उम्र ब-क़ैद-ए-सफ़र रहा हूँ मैं
सरफ़राज़ ख़ालिद
आँखों में अगर आप की सूरत नहीं होती
सरफ़राज़ अबद
तसव्वुरात की दुनिया सजाए बैठे हैं
सरदार सोज़
दर-ए-मय-कदा है खुला हुआ सर-ए-चर्ख़ आज घटा भी है
सरदार सोज़
ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत नहीं मुझे
सरदार सोज़
आता रहा हूँ याद मैं उस को तमाम उम्र
सदार आसिफ़
न जाने कैसी आँधी चल रही है
सदार आसिफ़
मैं जिन को ढूँडने निकला था गहरे ग़ारों में
सदार आसिफ़
लफ़्ज़ों का ये ख़ज़ाना तिरे नाम कब हुआ
सदार आसिफ़
दूसरा पहाड़
सारा शगुफ़्ता
न आसमान है साकित न दिल ठहरता है
साक़िब लखनवी
मुझे ख़बर थी मिरा इंतिज़ार घर में रहा
साक़ी फ़ारुक़ी
बद-गुमानी
साक़ी फ़ारुक़ी
सब कुछ न कहीं सोग मनाने में चला जाए
साक़ी फ़ारुक़ी
मुझ को मिरी शिकस्त की दोहरी सज़ा मिली
साक़ी फ़ारुक़ी
मुझे ख़बर थी मिरा इंतिज़ार घर में रहा
साक़ी फ़ारुक़ी
मिट्टी थी ख़फ़ा मौज उठा ले गई हम को
साक़ी फ़ारुक़ी
जो तेरे दिल में है वो बात मेरे ध्यान में है
साक़ी फ़ारुक़ी
ख़राब हो गया जब मेरे जिस्म का काग़ज़
संजय मिश्रा शौक़
गई नहीं तिरे ज़ुल्म-ओ-सितम की ख़ू अब तक
संजय मिश्रा शौक़
वो मेरे हाल-ए-दिल से इस क़दर भी बे-ख़बर होगा
संदीप कोल नादिम
इक उम्र की देर
समीना राजा
रौशनी तक रौशनी का रास्ता कह लीजिए
समद अंसारी
कहो तो आज बता दें तुम्हें हक़ीक़त भी
सलमान अख़्तर
जीना अज़ाब क्यूँ है ये क्या हो गया मुझे
सलमान अख़्तर
शिकार हो गया वो ख़ुद ही इस ज़माने का
सलमा शाहीन
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