पास Poetry (page 30)

मुँह बाँध कर कली सा न रह मेरे पास तू

फ़ाएज़ देहलवी

मुझ पास कभी वो क़द-ए-शमशाद न आया

फ़ाएज़ देहलवी

जान-ए-अय्याम-ए-दिलबरी है याद

फ़ाएज़ देहलवी

ऐ सजन वक़्त-ए-जाँ-गुदाज़ी है

फ़ाएज़ देहलवी

लहू ने क्या तिरे ख़ंजर को दिलकशी दी है

एज़ाज़ अफ़ज़ल

अब सराब के चश्मे मौजज़न नहीं होते

एज़ाज़ अफ़ज़ल

ना-सज़ा आलम-ए-इम्काँ में सज़ा लगता है

एजाज़ सिद्दीक़ी

हँसी लबों पे सजाए उदास रहता है

एजाज़ रहमानी

हथेलियों में लकीरों का जाल था कितना

एजाज़ उबैद

धुँद का आँखों पर होगा पर्दा इक दिन

एजाज़ उबैद

अपना अपना रंग

एजाज़ फ़ारूक़ी

मेरी मौत के मसीहा!

एजाज़ अहमद एजाज़

चाँद

एजाज़ अहमद एजाज़

सता रही है बहुत मछलियों की बास मुझे

एहतिशाम अख्तर

ख़्वाब आँखों में निहाँ है अब भी

एहतिशाम अख्तर

मिसाल-ए-आईना रहना कोई मज़ाक़ नहीं

डॉक्टर आज़म

बुलाना और न जाना चाहता हूँ

डॉक्टर आज़म

कभी आँसू कभी ख़्वाबों के धारे टूट जाते हैं

दिनेश ठाकुर

किस के सपनों से मिरी नींद सजी रहती है

दिनेश नायडू

लंदन में जश्न-ए-ग़ालिब

दिलावर फ़िगार

कराची का क़ब्रिस्तान

दिलावर फ़िगार

इलिएट्स-गर्ल्स-कॉलेज और कुल पाक ओ हिन्द मुशाएरा

दिलावर फ़िगार

चालीस चोर

दिलावर फ़िगार

अहमक़ों की कांफ्रेंस

दिलावर फ़िगार

ज़हर बीमार को मुर्दे को दवा दी जाए

दिलावर फ़िगार

कुछ यूँ सफ़र के शौक़ ने मंज़र दिखाए हैं

देवमणि पांडेय

सुनहरी मछली

दीप्ति मिश्रा

मशवरा

दाऊद ग़ाज़ी

मुझ साथ सैर-ए-बाग़ कूँ ऐ नौ-बहार चल

दाऊद औरंगाबादी

दिल में ख़याल-ए-यार है जासूस की नमत

दाऊद औरंगाबादी

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