पास Poetry (page 31)
अगर वो गुल-बदन मुझ पास हो जावे तो क्या होवे
दाऊद औरंगाबादी
ढूँढने से यूँ तो इस दुनिया में क्या मिलता नहीं
दत्तात्रिया कैफ़ी
ख़ुश-फमी-ए-हुनर ने सँभलने नहीं दिया
दरवेश भारती
जब से किसी से दर्द का रिश्ता नहीं रहा
दरवेश भारती
क्या वहीं मिलोगे तुम
दर्शिका वसानी
कहीं जमाल-ए-अज़ल हम को रूनुमा न मिला
दर्शन सिंह
चश्म-ए-बीना हो तो क़ैद-ए-हरम-ओ-तूर नहीं
दर्शन सिंह
मैं जाता हूँ दिल को तिरे पास छोड़े
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
बिला-जवाज़ नहीं है फ़लक से जंग मिरी
दानियाल तरीर
सितम के बा'द भी बाक़ी करम की आस तो है
दानिश फ़राही
जिस ख़त पे ये लगाई उसी का मिला जवाब
दाग़ देहलवी
सितम ही करना जफ़ा ही करना निगाह-ए-उल्फ़त कभी न करना
दाग़ देहलवी
क़रीने से अजब आरास्ता क़ातिल की महफ़िल है
दाग़ देहलवी
पुकारती है ख़मोशी मिरी फ़ुग़ाँ की तरह
दाग़ देहलवी
दिल मुब्तला-ए-लज़्ज़त-ए-आज़ार ही रहा
दाग़ देहलवी
नज़रों के गिर्द यूँ तो कोई दायरा न था
डी. राज कँवल
बी.टी-नामा
कर्नल मोहम्मद ख़ान
गुम-शुदा आदमी का इंतिज़ार
चन्द्रभान ख़याल
रामायण का एक सीन
चकबस्त ब्रिज नारायण
नए झगड़े निराली काविशें ईजाद करते हैं
चकबस्त ब्रिज नारायण
कुछ ऐसा पास-ए-ग़ैरत उठ गया इस अहद-ए-पुर-फ़न में
चकबस्त ब्रिज नारायण
दर्द-ए-दिल पास-ए-वफ़ा जज़्बा-ए-ईमाँ होना
चकबस्त ब्रिज नारायण
दर्द-ए-दिल पास-ए-वफ़ा जज़्बा-ए-ईमाँ होना
चकबस्त ब्रिज नारायण
ऐ 'जलीस' अब इक तुम्हीं में आदमियत हो तो हो
ब्रहमा नन्द जलीस
कैसे कहें कि चार तरफ़ दायरा न था
बिमल कृष्ण अश्क
जिस की हर बात में क़हक़हा जज़्ब था मैं न था दोस्तो
बिमल कृष्ण अश्क
इतना अच्छा न अगर होता तो हम सा होता
बिमल कृष्ण अश्क
ऐसे में रोज़ रोज़ कोई ढूँडता मुझे
बिमल कृष्ण अश्क
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