रास्ता Poetry (page 10)

कैसे रिश्तों को समेटें ये बिखरते हुए लोग

तारिक़ क़मर

वो ख़ुद गया है उस का असर तो नहीं गया

तारिक़ नईम

इस रात किसी और क़लम-रौ में कहीं था

तारिक़ नईम

इक न इक शम् अँधेरे में जलाए रखिए

तारिक़ बदायुनी

सुर्ख़ फंदे सुनहरी मालाएँ

तनवीर मोनिस

तिरी चाल धुन तिरी साँस सुर मिरे दिल को आ के सँभाल भी

तनवीर मोनिस

ख़ार चुनते हुए

तनवीर अंजुम

वही जो राह का पत्थर था बे-तराश भी था

तनवीर अहमद अल्वी

अजीब शख़्स है पत्थर से पर बनाता है

तनवीर अहमद अल्वी

ग़म-ए-दिल की ज़बाँ अहल-ए-तशद्दुद कम समझते हैं

तालिब चकवाली

न पहुँचा साथ यारान-ए-सफ़र की ना-तवानी से

तालिब अली खान ऐशी

यूँ भी तो तिरी राह की दीवार नहीं हैं

तालीफ़ हैदर

हम जब्र-ए-मोहब्बत से गुरेज़ाँ नहीं होते

तालीफ़ हैदर

बहुत मुश्किल था मुझ को राह का हमवार कर देना

तालीफ़ हैदर

हर रस्म पर नज़र को झुकाते हुए चले

तलअत इशारत

मोहब्बत में ज़ियाँ-कारी मुराद-ए-दिल न बन जाए

ताजवर नजीबाबादी

खिड़की में एक नार जो महव-ए-ख़याल है

ताज सईद

जी में आता है कि चल कर जंगलों में जा रहें

ताज सईद

इसे मैं और ये मेरा असा ही तय करेगा

तहसीन फ़िराक़ी

मिरी मंज़िलें कहीं और हैं मिरा रास्ता कोई और है

ताहिर फ़राज़

मैं उस की मोहब्बत से इक दिन भी मुकर जाता

ताहिर अज़ीम

सितम-ज़रीफ़ी की सूरत निकल ही आती है

तफ़ज़ील अहमद

तकोगे राह सहारों की तुम मियाँ कब तक

ताबिश मेहदी

देर तक मिल के रोते रहे राह में

ताबिश मेहदी

अगर फूलों की ख़्वाहिश है तो सुन लो

ताबिश मेहदी

दश्त-ए-तन्हाई बादल हवा और मैं

ताबिश मेहदी

बला से मर्तबे ऊँचे न रखना

ताबिश मेहदी

कई पड़ाव थे मंज़िल की राह में 'ताबिश'

ताबिश कमाल

एक बुज़ुर्ग शायर परिंदे का तजरबा

ताबिश कमाल

अजीब सुब्ह थी दीवार ओ दर कुछ और से थे

ताबिश कमाल

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