इक न इक शम् अँधेरे में जलाए रखिए

इक न इक शम् अँधेरे में जलाए रखिए

सुब्ह होने को है माहौल बनाए रखिए

दिल के हाथों से हमें ज़ख़्म-ए-निहाँ पहुँचे हैं

वो भी कहते हैं कि ज़ख़्मों को छुपाए रखिए

कौन जाने कि वो किस राहगुज़र पर गुज़रे

हर गुज़रगाह को फूलों से सजाए रखिए

दामन-ए-यार की ज़ीनत न बने हम अफ़्सोस

अपनी पलकों के लिए कुछ तो बचाए रखिए

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In Hindi By Famous Poet Tariq Badayuni. is written by Tariq Badayuni. Complete Poem in Hindi by Tariq Badayuni. Download free  Poem for Youth in PDF.  is a Poem on Inspiration for young students. Share  with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.