रास्ता Poetry (page 55)

इस शहर-ए-निगाराँ की कुछ बात निराली है

दिवाकर राही

चाक पर मिट्टी को मर जाना है

दिनेश नायडू

लंदन में जश्न-ए-ग़ालिब

दिलावर फ़िगार

लग गए हैं फ़ोन लगने में जो पच्चीस साल

दिलावर फ़िगार

कराची का क़ब्रिस्तान

दिलावर फ़िगार

चोर-साहिब से दरख़्वास्त

दिलावर फ़िगार

अल्लामा-'इक़बाल' को शिकवा

दिलावर फ़िगार

शाइ'र से शेर सुनिए तो मिस्रा उठाइए

दिलावर फ़िगार

न मिरा मकाँ ही बदल गया न तिरा पता कोई और है

दिलावर फ़िगार

कब तक फिरूंगा हाथ में कासा उठा के मैं

दिलावर अली आज़र

ये राह-ए-इश्क़ है आख़िर कोई मज़ाक़ नहीं

दिल अय्यूबी

हसीं है शहर तो उजलत में क्यूँ गुज़र जाएँ

दिल अय्यूबी

मुट्ठी में दो-चार नहीं

दीपक शर्मा दीप

आज मैं ने गुनाह कर डाला

दीपक शर्मा दीप

नज़र आया न कोई भी इधर देखा उधर देखा

दीपक क़मर

ज़ीस्त बे-वादा-ए-अनवार-ए-सहर है कि जो थी

द्वारका दास शोला

नहीं कहते किसी से हाल-ए-दिल ख़ामोश रहते हैं

द्वारका दास शोला

मिरी बे-क़रारी मिरी आह-ओ-ज़ारी ये वहशत नहीं है तो फिर और क्या है

द्वारका दास शोला

एक रहज़न को अमीर-ए-कारवाँ समझा था मैं

द्वारका दास शोला

सौग़ात

दाऊद ग़ाज़ी

यक क़दम राह-ए-दोस्त है 'दाऊद'

दाऊद औरंगाबादी

हुस्न इस शम्अ-रू का है गुल-रंग

दाऊद औरंगाबादी

फ़िदा अल्लाह की ख़िल्क़त पे जिस का जिस्म ओ जाँ होगा

दत्तात्रिया कैफ़ी

तमाम नूर-ए-तजल्ली तमाम रंग-ए-चमन

दर्शन सिंह

रक़्स करती है फ़ज़ा वज्द में जाम आया है

दर्शन सिंह

इस राह में आते हैं बयाबाँ भी चमन भी

दर्शन सिंह

हँसी गुलों में सितारों में रौशनी न मिली

दर्शन सिंह

दौलत मिली जहान की नाम-ओ-निशाँ मिले

दर्शन सिंह

क़ासिद नहीं ये काम तिरा अपनी राह ले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअ'त को पा सके

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

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