रात Poetry (page 71)

एक बुझाओ एक जलाओ ख़्वाब का क्या है

दानियाल तरीर

ब-तर्ज़-ए-ख़्वाब सजानी पड़ी है आख़िर-कार

दानियाल तरीर

कहानी एक रात की

दानिश फ़राज़ी

वाइज़ तू अगर उन के कूचे से गुज़र जाए

दानिश अलीगढ़ी

उन की फ़रमाइश नई दिन रात है

दाग़ देहलवी

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया

दाग़ देहलवी

दी शब-ए-वस्ल मोअज़्ज़िन ने अज़ाँ पिछली रात

दाग़ देहलवी

खुलता नहीं है राज़ हमारे बयान से

दाग़ देहलवी

कौन सा ताइर-ए-गुम-गश्ता उसे याद आया

दाग़ देहलवी

काबे की है हवस कभी कू-ए-बुताँ की है

दाग़ देहलवी

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया

दाग़ देहलवी

ग़म से कहीं नजात मिले चैन पाएँ हम

दाग़ देहलवी

फ़लक देता है जिन को ऐश उन को ग़म भी होते हैं

दाग़ देहलवी

बुतान-ए-माहवश उजड़ी हुई मंज़िल में रहते हैं

दाग़ देहलवी

भला हो पीर-ए-मुग़ाँ का इधर निगाह मिले

दाग़ देहलवी

दिन तो शिकम की आग बुझाने में जाए है

दाएम ग़व्वासी

चेहरे पे नूर-ए-सुब्ह सियह गेसुओं में रात

दाएम ग़व्वासी

बी.टी-नामा

कर्नल मोहम्मद ख़ान

रात की बात का मज़कूर ही क्या

चराग़ हसन हसरत

मचलेंगे उन के आने पे जज़्बात सैंकड़ों

चरख़ चिन्योटी

जो आँसुओं को न चमकाए वो ख़ुशी क्या है

चरख़ चिन्योटी

जल्वा-ए-हुस्न से है सूरत-ए-औक़ात नई

चरख़ चिन्योटी

जल्वा-ए-हुस्न से है सूरत-ए-औक़ात नई

चरख़ चिन्योटी

बे-ख़ुदी में है न वो पी कर सँभल जाने में है

चरख़ चिन्योटी

बज़्म-ए-जानाँ में मोहब्बत का असर देखेंगे

चरख़ चिन्योटी

बज़्म-ए-जानाँ में मोहब्बत का असर देखेंगे

चरख़ चिन्योटी

गुम-शुदा आदमी का इंतिज़ार

चन्द्रभान ख़याल

ख़त्म है बादल की जब से साएबानी धूप में

चाँदनी पांडे

हमें बर्बादियों पे मुस्कुराना ख़ूब आता है

चाँदनी पांडे

रामायण का एक सीन

चकबस्त ब्रिज नारायण

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