साथ Poetry (page 76)

महकती हुई तन्हाइयाँ

अशोक लाल

याद रक्खेगा मिरा कौन फ़साना मिरे दोस्त

अशफ़ाक़ नासिर

लगा हो दिल तो ख़यालात कब बदलते हैं

अशफ़ाक़ आमिर

इक शहर ज़िया-बार यहाँ भी है वहाँ भी

अशहर हाशमी

बस्ती मिली मकान मिले बाम-ओ-दर मिले

असग़र मेहदी होश

हम दश्त से हर शाम यही सोच के घर आए

असग़र गोरखपुरी

पास-ए-अदब में जोश-ए-तमन्ना लिए हुए

असग़र गोंडवी

मय-ए-बे-रंग का सौ रंग से रुस्वा होना

असग़र गोंडवी

हुस्न को वुसअतें जो दीं इश्क़ को हौसला दिया

असग़र गोंडवी

सीम-तन गुल-रुख़ों की बस्ती है

असग़र आबिद

चुपके से नाम ले के तुम्हारा कभी कभी

असर लखनवी

उल्फ़त का है मज़ा कि 'असर' ग़म भी साथ हों

असर अकबराबादी

उदास हो न तू ऐ दिल किसी के रोने से

असर अकबराबादी

साया भी साथ छोड़ गया अब तो ऐ 'असर'

असर अकबराबादी

फ़िक्र-ए-जहान दर्द-ए-मोहब्बत फ़िराक़-ए-यार

असर अकबराबादी

जाने क्यूँ लोग ग़म से डरते हैं

असर अकबराबादी

हम-साई

असद जाफ़री

रवाँ है क़ाफ़िला-ए-जुस्तुजू किधर मेरा

असद जाफ़री

देखिए अहद-ए-वफ़ा अच्छा नहीं

असद भोपाली

ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा होगा

असद भोपाली

दो-जहाँ से मावरा हो जाएगा

असद भोपाली

उस की तो एक दिल-लगी अपना बना के छोड़ दे

आरज़ू लखनवी

जो दिल साथ छुटने से घबरा रहा है

आरज़ू लखनवी

अव्वल-ए-शब वो बज़्म की रौनक़ शम्अ' भी थी परवाना भी

आरज़ू लखनवी

ऐ जज़्ब-ए-मोहब्बत तू ही बता क्यूँकर न असर ले दिल ही तो है

आरज़ू लखनवी

हमारी महफ़िलों में बे-हिजाब आने से क्या होगा

अर्शी रामपुरी

निगाह तेज़ शुऊ'र-ए-बुलंद रखते हैं

अर्शी भोपाली

लहू के साथ तबीअत में सनसनाती फिरे

अरशद मलिक

धूप छाँव के दरमियाँ

अरशद कमाल

दो-चार सितारे ही मिरी आँख में धर जा

अरशद जमाल 'सारिम'

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