साथ Poetry (page 87)

न गुमान मौत का है न ख़याल ज़िंदगी का

ऐतबार साजिद

मुहताज हम-सफ़र की मसाफ़त न थी मिरी

ऐतबार साजिद

मिरी रूह में जो उतर सकें वो मोहब्बतें मुझे चाहिएँ

ऐतबार साजिद

मैं तकिए पर सितारे बो हा हूँ

ऐतबार साजिद

छोटे छोटे कई बे-फ़ैज़ मफ़ादात के साथ

ऐतबार साजिद

आने वाली थी ख़िज़ाँ मैदान ख़ाली कर दिया

ऐतबार साजिद

न छोड़ी ग़म ने मिरे इक जिगर में ख़ून की बूँद

ऐश देहलवी

जो होता आह तिरी आह-ए-बे-असर में असर

ऐश देहलवी

वहशत में दिल कितना कुशादा करना पड़ता है

ऐनुद्दीन आज़िम

दर्द तेरा मिरे सीने से निकाला न गया

ऐनुद्दीन आज़िम

बदलने का कोई मौसम नहीं होता

ऐन ताबिश

जहाँ तक डूबने का डर है तुम को

ऐन इरफ़ान

ख़ुद अपने साथ धोका क्यूँ करूँ मैं

ऐन इरफ़ान

हो दिन कि चाहे रात कोई मसअला नहीं

ऐन इरफ़ान

शब-रंग परिंदे रग-ओ-रेशे में उतर जाएँ

अहसन यूसुफ़ ज़ई

गर्म-ए-सफ़र है गर्म-ए-सफ़र रह मुड़ मुड़ कर मत पीछे देख

अहसन शफ़ीक़

काट गई कोहरे की चादर सर्द हवा की तेज़ी माप

अहसन शफ़ीक़

इश्क़ करते हैं तो अहल-ए-इश्क़ यूँ सौदा करें

अहसन मारहरवी

रेत पर सफ़र का लम्हा

अहमद शमीम

तिरे पास रह कर सँवर जाऊँगा मैं

अहमद निसार

इल्म की ज़रूरत

अहमक़ फफूँदवी

हर क़दम पर मेरे अरमानों का ख़ूँ

अहमद ज़िया

वो फूल जो मुस्कुरा रहा है

अहमद ज़फ़र

जब तक जुनूँ जुनूँ है ग़म-ए-आगही भी है

अहमद ज़फ़र

फूलों में एक रंग है आँखों के नीर का

अहमद शनास

कुन-फ़यकूं का हासिल यानी मिट्टी आग हवा और पानी

अहमद शहरयार

ले के फिर ज़ख़्मों की सौग़ात बहारो आओ

अहमद शाहिद ख़ाँ

मुझे ये क्या पड़ी है कौन मेरा हम-सफ़र होगा

अहमद रिज़वान

शब ढले गुम्बद-ए-असरार में आ जाता है

अहमद रिज़वान

किसी को छोड़ देता हूँ किसी के साथ चलता हूँ

अहमद रिज़वान

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