साथ Poetry (page 86)

दिल की गिर्हें कहाँ वो खोलता है

अकबर हमीदी

सब हो चुके हैं उस बुत-ए-काफ़िर-अदा के साथ

अकबर इलाहाबादी

क़ौम के ग़म में डिनर खाते हैं हुक्काम के साथ

अकबर इलाहाबादी

मैं हूँ क्या चीज़ जो उस तर्ज़ पे जाऊँ 'अकबर'

अकबर इलाहाबादी

क्या वो ख़्वाहिश कि जिसे दिल भी समझता हो हक़ीर

अकबर इलाहाबादी

बूढ़ों के साथ लोग कहाँ तक वफ़ा करें

अकबर इलाहाबादी

मेरी तक़दीर मुआफ़िक़ न थी तदबीर के साथ

अकबर इलाहाबादी

ख़ुशी है सब को कि ऑपरेशन में ख़ूब निश्तर ये चल रहा है

अकबर इलाहाबादी

जज़्बा-ए-दिल ने मिरे तासीर दिखलाई तो है

अकबर इलाहाबादी

आज आराइ-ए-शगेसू-ए-दोता होती है

अकबर इलाहाबादी

ख़ुश-रंग किस क़दर ख़स-ओ-ख़ाशाक थे कभी

अकबर अली खान अर्शी जादह

हम अपने-आप में रहते हैं दम में दम जैसे

अजमल सिराज

घूम-फिर कर इसी कूचे की तरफ़ आएँगे

अजमल सिराज

मेरे साथ सु-ए-जुनून चल मिरे ज़ख़्म खा मिरा रक़्स कर

अजमल सिद्दीक़ी

न नज़र से कोई गुज़र सका न ही दिल से मलबा हटा सका

अजमल सिद्दीक़ी

खुल के बरसना और बरस कर फिर खुल जाना देखा है

अजमल सिद्दीक़ी

इतना करम इतनी अता फिर हो न हो

अजमल सिद्दीक़ी

रास्ते के पेच-ओ-ख़म क्या शय हैं सोचा ही नहीं

अजमल अजमली

हर उजाला नई सहर तो नहीं

अजमल अजमली

दर्द-ए-मुसलसल से आहों में पैदा वो तासीर हुई

आजिज़ मातवी

घोंसले राख हो गए जल के

अजीत सिंह हसरत

धुआँ सिफ़त हूँ ख़लाओं का है सफ़र मुझ को

अजीत सिंह हसरत

शाम आई है लिए हाथ में यादों के चराग़

अजय सहाब

लगा के धड़कन में आग मेरी ब-रंग-ए-रक़्स-ए-शरर गया वो

अजय सहाब

इतना पसपा न हो दीवार से लग जाएगा

ऐतबार साजिद

गुफ़्तुगू देर से जारी है नतीजे के बग़ैर

ऐतबार साजिद

छोटे छोटे कई बे-फ़ैज़ मफ़ादात के साथ

ऐतबार साजिद

ज़ख़्मों का दो-शाला पहना धूप को सर पर तान लिया

ऐतबार साजिद

ये ठीक है कि बहुत वहशतें भी ठीक नहीं

ऐतबार साजिद

तिरे जैसा मेरा भी हाल था न सुकून था न क़रार था

ऐतबार साजिद

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.